
कल्याण शताब्दी
कल्याण शताब्दी वर्ष (1926 - 2026) | 100 वर्ष
कल्याण पत्रिका, गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित सम्मानित हिंदी मासिक, ने जनवरी 2026 में ऋषिकेश में भव्य उत्सव के साथ अपनी 100वीं वर्षगांठ मनाई। 1927 में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए स्थापित, यह पत्रिका बिना विज्ञापनों के संचालन के लिए जानी जाती है और सनातन धर्म के प्रचार में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, 2026 के विशेष अंक में श्री रामचरितमानस को शामिल किया गया। शताब्दी समारोह के मुख्य विवरण: इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भाग लिया, जिन्होंने इस पत्रिका को भारतीय संस्कृति की राह दिखाने वाली प्रकाशस्तंभ के रूप में सम्मानित किया।
विशेष अतिथि
| अतिथि का नाम | विवरण | वीडियो |
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| श्री अमित शाह जी (माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार) | पूज्य भाईजी श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दारजीने। गीताप्रेसके माध्यमसे लगभग १०३ वर्षोंसे सनातन धर्मकी जो ये लौ है, उसको ताकत देनेका कार्य किया है। उन्होंने करोड़ों लोगोंको भक्तिके माध्यमसे अध्यात्मकी और प्रेरित किया और अध्यात्मके रास्तेपर आगे चलते-चलते मोक्षतकका रास्ता प्रशस्त करनेका मार्ग बताया। इस देशको …और पढ़ें | |
| श्री अमित शाह जी (माननीय गृह मंत्री, भारत सरकार) | पूज्य भाईजी श्रीहनुमान प्रसाद पोद्दारजीने। गीताप्रेसके माध्यमसे लगभग १०३ वर्षोंसे सनातन धर्मकी जो ये लौ है, उसको ताकत देनेका कार्य किया है। उन्होंने करोड़ों लोगोंको भक्तिके माध्यमसे अध्यात्मकी और प्रेरित किया और अध्यात्मके रास्तेपर आगे चलते-चलते मोक्षतकका रास्ता प्रशस्त करनेका मार्ग बताया। इस देशको …और पढ़ें | |
| श्री पुष्कर सिंह धामी जी (माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखंड ) | गीताप्रेसके द्वारा आयोजित 'कल्याणके शताब्दी-अंक' के इस विमोचन समारोहके अवसरपर पूज्य सन्तों, मुख्य अतिथि माननीय श्रीअमित भाई शाहजी, गीताप्रेसके पदाधिकारीगण, यहाँके लोकप्रिय सांसद श्रीअनिल बलूनीजी, कैबिनेट मन्त्री श्रीधनसिंह रावतजी, डॉ० सुबोध उनियालजी, विनय रोहिलाजी, हेमन्त द्विवेदीजी, राजगौरव नौटियाल…और पढ़ें | |
| श्री पुष्कर सिंह धामी जी (माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखंड ) |
संत
| संत का नाम | विवरण | वीडियो |
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| पूज्य द्वाराचार्य स्वामी श्री राजेन्द्रदास जी महाराज , वृंदावन-रेवासा | श्रद्धेय सेठजी, श्रद्धेय भाईजी, श्रद्धेय स्वामीजी और श्रद्धेय राधाबाबा के रूप में गीताप्रेस में चतुर्व्यूह का प्राकट्य हुआ, इसमें श्रद्धेय सेठजी, जो स्वयं गृहस्थ थे; परंतु उनके अनुगत स्वामीजी परम विरक्त थे। इसी प्रकार श्रद्धेय भाईजी भी गृहस्थ थे, परंतु उनके अनुगत श्रीराधाबाबाजी परम विरक्त थे। ये भगव…और पढ़ें | |
| पूज्य द्वाराचार्य स्वामी श्री राजेन्द्रदास जी महाराज , वृंदावन-रेवासा | श्रद्धेय सेठजी, श्रद्धेय भाईजी, श्रद्धेय स्वामीजी और श्रद्धेय राधाबाबा के रूप में गीताप्रेस में चतुर्व्यूह का प्राकट्य हुआ, इसमें श्रद्धेय सेठजी, जो स्वयं गृहस्थ थे; परंतु उनके अनुगत स्वामीजी परम विरक्त थे। इसी प्रकार श्रद्धेय भाईजी भी गृहस्थ थे, परंतु उनके अनुगत श्रीराधाबाबाजी परम विरक्त थे। ये भगव…और पढ़ें | |
| पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानन्द गिरि जी महाराज , हरिद्वार | कल्याण ने किस प्रकार कल्याण किया, उसका एक उदाहरण है - भारत के एक बहुत बड़े व्यक्ति ने बड़े ही गोपनीय ढंग से कभी एक बात कही थी, उनके मन में एक बार विचार आया कि जीवन न रखा जाय और ऐसे ही उनके मन में आत्मघात का विचार आया और विचार कर ही रहे थे कि संध्या हो, सूर्य अस्त हो, अँधेरा हो तो जीवन मिटाने के लिये… |