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    कल्याण पत्रिका

    'कल्याण' का शताब्दी-अङ्क

    2026 में गीताप्रेस ने 'कल्याण' शताब्दी-अङ्क प्रकाशित किया है, जिसमें प्रमुख विशेषांकों एवं साधारण-अङ्क से चयनित अति महत्त्वपूर्ण लेख सम्मिलित किये गये हैं।

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    कल्याण के बारे में

    'कल्याण'-गीताप्रेस : शताब्दी की आध्यात्मिक विरासत और जीवन-दिशा

    गीताप्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित मासिक 'कल्याण' धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रकाशन है, जिसने एक शताब्दी से अधिक समय से मानवता को जीवन के उच्च आदर्शों और नैतिक मूल्यों को प्रेरणा प्रदान करने का कार्य किया है। सन् 1926 से प्रकाशित हो रहा 'कल्याण' पाठकों के बीच प्रतिष्ठित ही नहीं, प्रशंसित भी रहा है, इसमें भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, निष्काम कर्मयोग आश्रमधर्म, नारीधर्म आदि विषय ही प्रधान रूप से वर्णित होते हैं।


    'कल्याण' अपने शताब्दी-वर्ष में प्रवेश कर चुका है। ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्रीजयदयाल जी गोयन्दका द्वारा भगवत्प्रेरणा से स्थापित एवं आदिसम्पादक भाईजी श्री हनुमानप्रसाद जी पोद्दार द्वारा पुष्पित-पल्लवित यह पत्रिका धर्म, अध्यात्म, भक्ति, ज्ञान, वैराग्य एवं सदाचार आदि के प्रसार-हेतु समर्पित है। यह भगवान् की कृपा ही है कि अनेक विरक्त सन्तों के आशीर्वाद, विद्वान् लेखकों के सहयोग एवं धर्म-संस्कृति के प्रेमी पाठकों के कारण बिना बाहरी विज्ञापन के 'कल्याण' आज भी अपनी परम्परागत शैली में सतत प्रकाशित हो रहा है। वस्तुतः यह भगवान् का ही कार्य है, जिसका परोक्ष नियन्त्रण वे स्वयं ही करते हैं। १०० वर्षों की इस यात्रा में अब तक जनवरी २०२६ तक लगभग १७ करोड़ ५० लाख प्रतियाँ प्रकाशित की जा चुकी हैं।



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    कल्याण की सदस्यता क्यों?

    नियमित आध्यात्मिक पोषण एवं नैतिक चिंतन प्राप्त होना। गहन अध्ययन के लिये संदर्भ-सामग्री। विश्वसनीयता एवं धरोहर का अद्भुत संगम : एक प्रतिष्ठित और शताब्दी-पुराना प्रकाशन, जिसकी सामग्री पीढ़ियों से प्रामाणिक और विश्वसनीय मानी जाती रही है। विषय-वस्तु संग्रहणीय, पठनीय एवं आचरणीय।

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    पत्रिका में धर्म, दर्शन, पुराण, उपनिषद्, संतों के जीवन, भक्ति-मार्ग और साधना-तत्त्व पर उच्चकोटि के लेख प्रकाशित होते हैं, जो जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाते हैं। विशेषांक में उपनिषद्, तीर्थ, संत-वाणी, योग, आरोग्य, शक्ति आदि विषयों पर व्यापक और गहन लेख शामिल होते हैं, जिससे पाठकों का ज्ञानक्षेत्र बढ़ता है। उच्च गुणवत्तावाला प्रकाशन होने के कारण मानक-अनुकूल, छपाई, भाषा-शैली, सामग्री की विश्वसनीयता एवं लागत से कम मूल्य पर सुलभ।

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