
श्रध्देय स्वामी श्रीरामसुखदासजीके कल्याणकारी साहित्य
गीता प्रेस, गोरखपुर | गीता प्रेस गोरखपुर | गीता प्रेस, गोरखपुर | अच्छे बनो | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 425
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मानव अपने उद्धार और पतन का दायित्व स्वतः वहन करता है, अतः उसे कर्तव्य-कर्म को शास्त्रोचित ढंग से सम्पादित करते हुए केवल उत्कट अभिलाषा से परमात्मज्ञान प्राप्त कर जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर लेना चाहिये। प्रस्तुत पुस्तक में व्यवहार तथा परमार्थ-सम्बन्धी अनेक लेखों का संग्रह किया गया है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 425
टैग:Swami Ramsukhdas Ji
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मानव अपने उद्धार और पतन का दायित्व स्वतः वहन करता है, अतः उसे कर्तव्य-कर्म को शास्त्रोचित ढंग से सम्पादित करते हुए केवल उत्कट अभिलाषा से परमात्मज्ञान प्राप्त कर जीवन के लक्ष्य को प्राप्त कर लेना चाहिये। प्रस्तुत पुस्तक में व्यवहार तथा परमार्थ-सम्बन्धी अनेक लेखों का संग्रह किया गया है।
- 80 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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