भगवान से अपनापन (हिन्दी)

श्रध्देय स्वामी श्रीरामसुखदासजीके कल्याणकारी साहित्य (श्रेणी)
एमआरपी15

पुस्तक के बारे में

कोड408
भाषाहिन्दी
पृष्ठों की संख्या 96
पुस्तकाकार पुस्तकाकार (13.5cm*20.32cm)
हार्ड बाउंड MRP 15

विवरण

यद्यपि हम परमात्मा के ही हैं, क्योंकि परमात्मा का अंश जीव अपने अंशी परमात्मा से अलग हो ही नहीं सकता, तथापि इस मान्यता के बिना कि हम परमात्मा के हैं, जीव परमात्मा से विमुख ही रहता है। प्रत्युत पुस्तक भगवान में निष्ठा पैदा कर साधना में तीव्रता लानेवाले स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज के प्रवचनों का सुन्दर संग्रह है।

Swami Ramsukhdas Ji

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