
भगवान से अपनापन
भगवान से अपनापन · हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 408 · हिन्दी
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यद्यपि हम परमात्मा के ही हैं, क्योंकि परमात्मा का अंश जीव अपने अंशी परमात्मा से अलग हो ही नहीं सकता, तथापि इस मान्यता के बिना कि हम परमात्मा के हैं, जीव परमात्मा से विमुख ही रहता है। प्रत्युत पुस्तक भगवान में निष्ठा पैदा कर साधना में तीव्रता लानेवाले स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज के प्रवचनों का सुन्दर संग्रह है।
प्रारूप
एसकेयू: 408
अन्य भाषाओं में उपलब्ध: गुजराती, ओड़िया, तेलुगू
यद्यपि हम परमात्मा के ही हैं, क्योंकि परमात्मा का अंश जीव अपने अंशी परमात्मा से अलग हो ही नहीं सकता, तथापि इस मान्यता के बिना कि हम परमात्मा के हैं, जीव परमात्मा से विमुख ही रहता है। प्रत्युत पुस्तक भगवान में निष्ठा पैदा कर साधना में तीव्रता लानेवाले स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज के प्रवचनों का सुन्दर संग्रह है।
- 96 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
4 संस्करण · 4 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| भगवान से अपनापन | गुजराती | 96 | 1066 | ₹10 |
| भगवान से अपनापन (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 96 | 408 | ₹15 |
| भगवान से अपनापन (उड़िया) | ओड़िया | 96 | 1138 | ₹20 |
| भगवान आत्मीय हैं | तेलुगू | 48 | 906 | ₹10 |
भगवान से अपनापन · गुजरातीकोड 1066 · 96 पृष्ठ · ₹10

भगवान से अपनापन · हिन्दी
कोड 408 · 96 पृष्ठ · ₹15 · यह पृष्ठ
भगवान से अपनापन (उड़िया) · ओड़ियाकोड 1138 · 96 पृष्ठ · ₹20
भगवान आत्मीय हैं · तेलुगूकोड 906 · 48 पृष्ठ · ₹10
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