
नित्य पाठ-साधन-भजन एवं कर्मकाण्ड-हेतु
भजनामृत | गीता प्रेस, गोरखपुर | भजनामृत | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 144
तुरंत पढ़ेंउपलब्ध है
₹20
भक्तों के लिये भजनों का महत्त्व अमृत-तुल्य है। भगवत्प्रेम में उन्मत्त प्रेमी का मन अनेक प्रकार के भावतरंगों से अनुप्राणित होकर भजन बन जाता है। इन्हीं भावतरंगों की सहज माधुरी को समेटकर 67 मधुर भजनों का यह संग्रह निवेदन, भगवद्-वियोग, लीलागान आदि शीर्षकों में प्रकाशित किया गया है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 144
टैग:Gita Press Gorakhpur
शेयर करना:
भक्तों के लिये भजनों का महत्त्व अमृत-तुल्य है। भगवत्प्रेम में उन्मत्त प्रेमी का मन अनेक प्रकार के भावतरंगों से अनुप्राणित होकर भजन बन जाता है। इन्हीं भावतरंगों की सहज माधुरी को समेटकर 67 मधुर भजनों का यह संग्रह निवेदन, भगवद्-वियोग, लीलागान आदि शीर्षकों में प्रकाशित किया गया है।
- 96 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
त्वरित शिपिंग
पूरे भारत में डिलीवरी
सुविधाजनक भुगतान
यूपीआई, कार्ड और कैश ऑन डिलीवरी
24x7 सहायता
हम आपकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं