भजनामृत (हिन्दी)

नित्य पाठ-साधन-भजन एवं कर्मकाण्ड-हेतु (श्रेणी)
एमआरपी20

पुस्तक के बारे में

कोड144
भाषाहिन्दी
पृष्ठों की संख्या 96
पुस्तकाकार पुस्तकाकार (13.5cm*20.32cm)
हार्ड बाउंड MRP 20

विवरण

भक्तों के लिये भजनों का महत्त्व अमृत-तुल्य है। भगवत्प्रेम में उन्मत्त प्रेमी का मन अनेक प्रकार के भावतरंगों से अनुप्राणित होकर भजन बन जाता है। इन्हीं भावतरंगों की सहज माधुरी को समेटकर 67 मधुर भजनों का यह संग्रह निवेदन, भगवद्-वियोग, लीलागान आदि शीर्षकों में प्रकाशित किया गया है।

Gita Press Gorakhpur

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