
भक्त सप्तरत्न
हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 173 · हिन्दी
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भक्त चाहे किसी भी देश, काल, जातिमें उत्पन्न क्यों न हो भगवद्भक्तिके प्रभावसे वह सर्वपूज्य संत बन जाता है। इस भक्तचरितमालामें ऐसे ही प्रेमी भक्त दामाजी पंत, रघु केवट, कूबा कुम्हार, यवन भक्त सालबेग आदिके सुन्दर चरित्र पिरोये हुए हैं। (कोड नं. 841) कन्नड़ और (कोड नं. 1082) गुजरातीमें भी उपलब्ध।
एसकेयू: 173
अन्य भाषाओं में उपलब्ध: कन्नड़
भक्त चाहे किसी भी देश, काल, जातिमें उत्पन्न क्यों न हो भगवद्भक्तिके प्रभावसे वह सर्वपूज्य संत बन जाता है। इस भक्तचरितमालामें ऐसे ही प्रेमी भक्त दामाजी पंत, रघु केवट, कूबा कुम्हार, यवन भक्त सालबेग आदिके सुन्दर चरित्र पिरोये हुए हैं। (कोड नं. 841) कन्नड़ और (कोड नं. 1082) गुजरातीमें भी उपलब्ध।
- 80 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
2 संस्करण · 2 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| भक्त सप्तरत्न (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 80 | 173 | ₹15 |
| भक्त सप्तरत्न | कन्नड़ | 96 | 841 | ₹12 |

भक्त सप्तरत्न · हिन्दी
कोड 173 · 80 पृष्ठ · ₹15 · यह पृष्ठ
भक्त सप्तरत्न · कन्नड़कोड 841 · 96 पृष्ठ · ₹12
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