
एक महात्मा का प्रसाद | गीता प्रेस, गोरखपुर | एक महात्मा का प्रसाद | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 129
महात्माओं की महिमा अवर्णनीय है। उनका मुख्य कार्य संसार से अज्ञानान्धकार नाश कर के विमल ज्ञान का प्रकाश करना है। महात्माओं का संसार में निवास लोक-कल्याण के लिये ही होता है। प्रस्तुत पुस्तक ऐसे ही एक तत्त्वज्ञानी महात्मा के संसार-सागर से उद्धार करनेवाले अमूल्य उपदेशों का संकलन है। इसमें चित्तशुद्धि का उपाय, योग, बोध और प्रेम, गुणों के अभिमान से हानि, सत्संग करने की रीति आदि विभिन्न 30 प्रकरणों में साधना के अमृत-उपदेशों का सुन्दर संकलन है।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 129
महात्माओं की महिमा अवर्णनीय है। उनका मुख्य कार्य संसार से अज्ञानान्धकार नाश कर के विमल ज्ञान का प्रकाश करना है। महात्माओं का संसार में निवास लोक-कल्याण के लिये ही होता है। प्रस्तुत पुस्तक ऐसे ही एक तत्त्वज्ञानी महात्मा के संसार-सागर से उद्धार करनेवाले अमूल्य उपदेशों का संकलन है। इसमें चित्तशुद्धि का उपाय, योग, बोध और प्रेम, गुणों के अभिमान से हानि, सत्संग करने की रीति आदि विभिन्न 30 प्रकरणों में साधना के अमृत-उपदेशों का सुन्दर संकलन है।
- 256 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
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