गीता साधक संजीवनी श्री स्वामी श्रीरामसुखदासजी द्वारा | भाषा: हिन्दी | कोड: 5

श्रीमद्भगवद्गीता (श्रेणी)
एमआरपी800

पुस्तक के बारे में

कोड5
भाषाहिन्दी
पृष्ठों की संख्या 1296
पुस्तकाकार वृहदाकार (27.03cm*36.4cm)
हार्ड बाउंड MRP 800

विवरण

श्रीमद्भगवद गीता – साधक संजीवनी (Shrimad Bhagavad Gita – Sadhak Sanjivani) भगवद गीता की सबसे गहन और व्यापक रूप से सम्मानित व्याख्याओं में से एक है, जिसे स्वामी रामसुखदास जी, आधुनिक भारत के एक प्रसिद्ध साधु और दार्शनिक ने लिखा है।


गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, इस संस्करण में मूल संस्कृत श्लोक, उनका हिंदी अनुवाद, और विस्तृत टीका शामिल है, जो भगवान कृष्ण की शाश्वत ज्ञान को व्यावहारिक और सरल तरीके से समझाता है।


साधक संजीवनी शब्द का अर्थ है "साधकों के लिए जीवन अमृत," और यह टीका वास्तव में पाठकों की आध्यात्मिक चेतना को पुनर्जीवित करती है। यह साधकों (भक्तों) के लिए जीवन की चुनौतियों को पार करने, कर्म को समझने, और दिव्य सामंजस्य में जीने के लिए मार्गदर्शक के रूप में कार्य करती है।


स्वामी रामसुखदास जी द्वारा भगवद्गीता पर सम्पूर्ण हिंदी टीका, गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित — आध्यात्मिक साधकों और भक्तों के लिए जीवन बदल देने वाला मार्गदर्शक।


मुख्य विशेषताएँ :

• श्री स्वामी श्रीरामसुखदासजी की सर्वांगीण हिंदी टीका — स्पष्ट, भक्तिपूर्ण और व्यावहारिक।

• मूल संस्कृत श्लोकों के साथ अर्थ, जो अध्ययन, शिक्षण और दैनिक चिंतन के लिए आदर्श।

• गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, जो भारतीय हिन्दू आध्यात्मिक साहित्य का सबसे प्रामाणिक स्रोत है।

• कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग जैसे प्रमुख सूत्रों की व्याख्या सरल और समझने योग्य तरीके से।

• साधक, विद्यार्थी और आध्यात्मिक दार्शनिकता के पाठकों के लिए जीवन बदल देने वाली पुस्तक।

• स्पष्ट देवनागरी लिपि में मुद्रित, सभी आयु वर्ग के लिए उपयुक्त।

Gita Sadhak Sanjivani (Hindi)

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