
गीता प्रेस गोरखपुर | जीवन के कर्तव्य | गीता प्रेस गोरखपुर | गीता प्रेस, गोरखपुर | जीवन का कर्तव्य | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 403
सन्त और भगवन्त दोनों का उद्देश्य मनुष्यमात्र को उठाकर ईश्वर की कोटि में पहुँचाना तथा दुःख और दैन्य की आत्यन्तिक निवृत्ति करना है। इस पुस्तक में परम श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज द्वारा समय-समय पर दिये गये चेतावनी, वैराग्य, नाम-जप आदि अनेक कल्याणकारी विषयों के व्याख्यानों का संकलन किया गया है। यह व्याख्यान संग्रह प्रत्येक व्यक्ति के आत्मोद्धार में सच्चा सहायक है।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 403
सन्त और भगवन्त दोनों का उद्देश्य मनुष्यमात्र को उठाकर ईश्वर की कोटि में पहुँचाना तथा दुःख और दैन्य की आत्यन्तिक निवृत्ति करना है। इस पुस्तक में परम श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज द्वारा समय-समय पर दिये गये चेतावनी, वैराग्य, नाम-जप आदि अनेक कल्याणकारी विषयों के व्याख्यानों का संकलन किया गया है। यह व्याख्यान संग्रह प्रत्येक व्यक्ति के आत्मोद्धार में सच्चा सहायक है।
- 160 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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