
ॐ नमः शिवाय | गीता प्रेस, गोरखपुर | ॐ नमः शिवाय | हिंदी |आकार: बड़ा (ग्रन्थाकार) |कोड: 204
विशाल भारत के अनेकों स्थानों पर लिंगरूप से भगवान् शिव की पूजा-अर्चना होती चली आ रही है। ये स्वल्प उपासना से प्रसन्न होकर भक्तों को मनोवाञ्छित फल प्रदान करते हैं। इस पुस्तक में भगवान् शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों का सरल परिचय दिया गया है। इस में ज्योतिर्लिंगों के उद्भव, विकास तथा माहात्म्य का मनोहर विवेचन है। पुस्तक में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का आकर्षक रंगीन चित्र भी दिया गया है।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 204
विशाल भारत के अनेकों स्थानों पर लिंगरूप से भगवान् शिव की पूजा-अर्चना होती चली आ रही है। ये स्वल्प उपासना से प्रसन्न होकर भक्तों को मनोवाञ्छित फल प्रदान करते हैं। इस पुस्तक में भगवान् शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों का सरल परिचय दिया गया है। इस में ज्योतिर्लिंगों के उद्भव, विकास तथा माहात्म्य का मनोहर विवेचन है। पुस्तक में द्वादश ज्योतिर्लिंगों का आकर्षक रंगीन चित्र भी दिया गया है।
- 36 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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