संत जगन्नाथ दास भागवत दशम स्कंद | भाषा: उड़िया | साइज़: बड़ा (ग्रंथकार) | कोड: 1777

पुराण, उपनिषद् आदि (श्रेणी)
एमआरपी120

पुस्तक के बारे में

कोड1777
भाषाओड़िया
पृष्ठों की संख्या 320
पुस्तकाकार ग्रन्थाकार (18.62cm*27.1cm)
हार्ड बाउंड MRP 120

विवरण

दशम स्कंध – भाग एक में श्रीमद् भागवतम् के दसवें स्कंध का आरंभिक भाग प्रस्तुत किया गया है, जिसे भागवत पुराण का हृदय माना जाता है। यह खंड भगवान श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं, शिक्षाओं और चमत्कारों पर केंद्रित है, जिनका वर्णन प्रामाणिक ओडिया (उड़िया) भाषा में किया गया है, जो शास्त्रों की पवित्रता और क्षेत्रीय भक्ति परंपरा दोनों को संरक्षित करता है। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक ओडिशा के जगन्नाथ संस्कृति और वैष्णव परंपराओं में पारंपरिक रूप से पढ़े और अध्ययन किए जाने वाले पवित्र भागवत वृत्तांतों का सटीक वर्णन करती है। यह ग्रंथ भक्तों के प्रति कृष्ण की दिव्य सुरक्षा, दुष्ट शक्तियों के नाश और धर्म के सर्वोच्च आश्रय के रूप में उनकी भूमिका को उजागर करता है।


प्रमुख विशेषताऐं

शास्त्रों के पठन, दैनिक प्रार्थना, मंदिर में पाठ और भागवत के अध्ययन के लिए डिज़ाइन की गई यह पुस्तक उन भक्तों के लिए आदर्श है जो अपनी मातृभाषा में आध्यात्मिक गहराई, सांस्कृतिक निरंतरता और भक्तिमय प्रेरणा की तलाश में हैं।

यह पुस्तक पवित्र कथाओं के माध्यम से भगवान कृष्ण के प्रति भक्ति को गहरा करती है।

यह आस्था, समर्पण और नैतिक स्पष्टता को प्रोत्साहित करती है। भागवत के अध्ययन, पारायण और सत्संग के लिए आदर्श।

यह ओडिया वैष्णव भक्ति परंपरा को संरक्षित करती है।

यह दैनिक जीवन में शांति, प्रेरणा और आध्यात्मिक आनंद लाती है।

Gita Press Gorakhpur

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