शिव महापुराण हिंदी (द्वितीय खंड – उत्तरार्ध) – संस्कृत श्लोक हिंदी अनुवाद और टीका सहित | गीता प्रेस गोरखपुर प्रकाशन
पुराण, उपनिषद् आदि (श्रेणी)विवरण
शिव महापुराण (द्वितीय खंड – उत्तरार्द्ध), गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, शिव महापुराण का अंतिम भाग है, जो हिंदू धर्म में अत्यंत पूजनीय ग्रंथों में से एक है और भगवान शिव को समर्पित है — जो ब्रह्मांडीय ऊर्जा, करुणा और संन्यास का प्रतीक हैं।
यह पवित्र ग्रंथ मूल संस्कृत श्लोकों के साथ विस्तृत हिंदी अनुवाद और टीका प्रस्तुत करता है, जो सृष्टि, संहार, भक्ति और मोक्ष के रहस्यों को समझाता है। यह गहन आध्यात्मिक संवादों, शिव-पार्वती लीला, शिवरात्रि का महत्व और शिव के नाम (ॐ नमः शिवाय) की शक्ति का वर्णन करता है।
सरल और भक्ति प्रधान भाषा में लिखा गया, यह संस्करण पाठकों को शिव तत्व की दर्शनशास्त्र समझने, भक्ति (सम्मोहन) की प्रथा अपनाने और आस्था और ध्यान के माध्यम से मोक्ष (मुक्ति) प्राप्त करने के लिए मार्गदर्शन करता है।
मुख्य विशेषताएँ:
• हिंदी अर्थ और व्याख्या के साथ संस्कृत श्लोक शामिल हैं।
• गीता प्रेस, गोरखपुर, भारत के सबसे पुराने आध्यात्मिक प्रकाशक द्वारा प्रामाणिक प्रकाशन।
• शिव पुराण के उत्तरार्ध (अंतिम भाग) से प्रमुख शिक्षाओं को कवर करता है।
• मध्यस्थ मुद्रा और दिव्य रूप में भगवान शिव की चित्रात्मक अभिव्यक्ति के साथ।
• भक्तों, आध्यात्मिक साधकों और हिंदू दर्शन के विद्वानों के लिए आदर्श।





