
श्री दासबोध | गीता प्रेस, गोरखपुर | श्री दासबोध | मराठी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 1780
श्री दासबोध भारत के सबसे पूजनीय आध्यात्मिक ग्रंथों में से एक है, जिसकी रचना महान संत, दार्शनिक और छत्रपति शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु संत समर्थ रामदास ने की थी। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह मराठी संस्करण मूल भक्तिमय गहनता और दार्शनिक स्पष्टता को बरकरार रखता है। गुरु और शिष्य के संवाद के रूप में लिखित श्री दासबोध संतुलित जीवन जीने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करता है, जो आध्यात्मिक ज्ञान और सांसारिक उत्तरदायित्वों के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह मानवीय जीवन की चुनौतियों का समाधान करते हुए भक्ति, विवेक, वैराग्य, धर्म और आत्म-अनुशासन पर अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। प्रमुख विशेषताऐं यह ग्रंथ जटिल वेदांतिक सिद्धांतों को सरल और सीधे ढंग से समझाता है, जिससे गृहस्थों, साधकों और आध्यात्मिक विकास के इच्छुक लोगों के लिए यह सुलभ हो जाता है। यह आंतरिक पवित्रता, नैतिक शक्ति, समाज सेवा और ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति को मुक्ति का मार्ग बताता है। यह संस्करण विशेष रूप से मराठी पाठकों के लिए मूल्यवान है जो समर्थ रामदास की प्रामाणिक शिक्षाओं का उनके मूल भाषाई और सांस्कृतिक संदर्भ में अध्ययन करना चाहते हैं। यह पुस्तक आध्यात्मिक स्पष्टता और नैतिक अनुशासन का निर्माण करती है। पाठकों को भक्ति और दैनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में मार्गदर्शन करती है। आत्मविश्वास, वैराग्य और धार्मिक जीवन को प्रोत्साहित करती है। गुरु-शिष्य परंपरा की समझ को मजबूत करती है। दैनिक पठन, चिंतन और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए आदर्श।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 1780
श्री दासबोध भारत के सबसे पूजनीय आध्यात्मिक ग्रंथों में से एक है, जिसकी रचना महान संत, दार्शनिक और छत्रपति शिवाजी महाराज के आध्यात्मिक गुरु संत समर्थ रामदास ने की थी। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह मराठी संस्करण मूल भक्तिमय गहनता और दार्शनिक स्पष्टता को बरकरार रखता है। गुरु और शिष्य के संवाद के रूप में लिखित श्री दासबोध संतुलित जीवन जीने के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करता है, जो आध्यात्मिक ज्ञान और सांसारिक उत्तरदायित्वों के बीच सामंजस्य स्थापित करता है। यह मानवीय जीवन की चुनौतियों का समाधान करते हुए भक्ति, विवेक, वैराग्य, धर्म और आत्म-अनुशासन पर अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।
प्रमुख विशेषताऐं
यह ग्रंथ जटिल वेदांतिक सिद्धांतों को सरल और सीधे ढंग से समझाता है, जिससे गृहस्थों, साधकों और आध्यात्मिक विकास के इच्छुक लोगों के लिए यह सुलभ हो जाता है।
यह आंतरिक पवित्रता, नैतिक शक्ति, समाज सेवा और ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति को मुक्ति का मार्ग बताता है।
यह संस्करण विशेष रूप से मराठी पाठकों के लिए मूल्यवान है जो समर्थ रामदास की प्रामाणिक शिक्षाओं का उनके मूल भाषाई और सांस्कृतिक संदर्भ में अध्ययन करना चाहते हैं।
यह पुस्तक आध्यात्मिक स्पष्टता और नैतिक अनुशासन का निर्माण करती है।
पाठकों को भक्ति और दैनिक जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने में मार्गदर्शन करती है।
आत्मविश्वास, वैराग्य और धार्मिक जीवन को प्रोत्साहित करती है।
गुरु-शिष्य परंपरा की समझ को मजबूत करती है।
दैनिक पठन, चिंतन और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए आदर्श।
- 736 पृष्ठ
- भाषा: मराठी
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- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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