
श्री गुरु चरित्र | श्री नृसिंह सरस्वती का जीवन और शिक्षाएँ | गीता प्रेस, गोरखपुर | श्री गुरुचरित्र | मराठी |आकार: बड़ा (ग्रन्थाकार) |कोड: 1836
गोरखपुर स्थित गीता प्रेस द्वारा ओविताबन्ध (मराठी) में प्रकाशित श्री गुरु चरित्र, भगवान दत्तात्रेय के द्वितीय अवतार श्री नरसिम्हा सरस्वती के दिव्य जीवन, शिक्षाओं, चमत्कारों और करुणामय कार्यों का वर्णन करने वाला एक पूजनीय आध्यात्मिक ग्रंथ है। दत्तात्रेय परंपरा के सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक माने जाने वाले इस ग्रंथ का व्यापक रूप से पारायण, आध्यात्मिक उत्थान और भक्तिमय अभ्यास के लिए अध्ययन किया जाता है। यह संस्करण पारंपरिक ओवि छंद का अनुसरण करता है, जिससे मूल रचना में प्रयुक्त प्रामाणिक काव्य प्रवाह बरकरार रहता है। सुलभ मराठी में लिखित यह ग्रंथ गुरु दत्तात्रेय की दिव्य वंशावली, गुरु-भक्ति के महत्व, भक्तों की कहानियों, चमत्कारी हस्तक्षेपों और धर्म के मार्ग को समाहित करता है। प्रमुख विशेषताऐं गीता प्रेस स्पष्ट मुद्रण, टिकाऊ बंधन और आध्यात्मिक प्रामाणिकता सुनिश्चित करता है, जो इसे भक्तों, परिवारों और आध्यात्मिक अध्ययन समूहों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है। यह एक शक्तिशाली ग्रंथ है जिसे मानसिक शांति, सुरक्षा और दिव्य मार्गदर्शन प्रदान करने वाला माना जाता है। यह पुस्तक गुरु-भक्ति, समर्पण और गुरु की कृपा के प्रति समर्पण को मजबूत करती है। दैनिक या साप्ताहिक पारायण के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन स्थापित करने में सहायक है। पवित्र कथाओं और शिक्षाओं के माध्यम से मानसिक स्पष्टता और शांति को बढ़ावा देती है। जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए नैतिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। दत्तात्रेय परंपरा और उसकी आध्यात्मिक वंशावली की समझ को बेहतर बनाती है। भक्तिपूर्ण जीवन, विनम्रता और सेवा को प्रोत्साहित करती है। घर पर पाठ, मंदिरों, सत्संगों और आध्यात्मिक सभाओं के लिए उपयुक्त है।
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प्रारूप
एसकेयू: 1836
गोरखपुर स्थित गीता प्रेस द्वारा ओविताबन्ध (मराठी) में प्रकाशित श्री गुरु चरित्र, भगवान दत्तात्रेय के द्वितीय अवतार श्री नरसिम्हा सरस्वती के दिव्य जीवन, शिक्षाओं, चमत्कारों और करुणामय कार्यों का वर्णन करने वाला एक पूजनीय आध्यात्मिक ग्रंथ है। दत्तात्रेय परंपरा के सबसे पवित्र ग्रंथों में से एक माने जाने वाले इस ग्रंथ का व्यापक रूप से पारायण, आध्यात्मिक उत्थान और भक्तिमय अभ्यास के लिए अध्ययन किया जाता है। यह संस्करण पारंपरिक ओवि छंद का अनुसरण करता है, जिससे मूल रचना में प्रयुक्त प्रामाणिक काव्य प्रवाह बरकरार रहता है। सुलभ मराठी में लिखित यह ग्रंथ गुरु दत्तात्रेय की दिव्य वंशावली, गुरु-भक्ति के महत्व, भक्तों की कहानियों, चमत्कारी हस्तक्षेपों और धर्म के मार्ग को समाहित करता है।
प्रमुख विशेषताऐं
गीता प्रेस स्पष्ट मुद्रण, टिकाऊ बंधन और आध्यात्मिक प्रामाणिकता सुनिश्चित करता है, जो इसे भक्तों, परिवारों और आध्यात्मिक अध्ययन समूहों के लिए एक आदर्श विकल्प बनाता है।
यह एक शक्तिशाली ग्रंथ है जिसे मानसिक शांति, सुरक्षा और दिव्य मार्गदर्शन प्रदान करने वाला माना जाता है।
यह पुस्तक गुरु-भक्ति, समर्पण और गुरु की कृपा के प्रति समर्पण को मजबूत करती है।
दैनिक या साप्ताहिक पारायण के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन स्थापित करने में सहायक है।
पवित्र कथाओं और शिक्षाओं के माध्यम से मानसिक स्पष्टता और शांति को बढ़ावा देती है।
जीवन की चुनौतियों से निपटने के लिए नैतिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। दत्तात्रेय परंपरा और उसकी आध्यात्मिक वंशावली की समझ को बेहतर बनाती है।
भक्तिपूर्ण जीवन, विनम्रता और सेवा को प्रोत्साहित करती है।
घर पर पाठ, मंदिरों, सत्संगों और आध्यात्मिक सभाओं के लिए उपयुक्त है।
- 448 पृष्ठ
- भाषा: मराठी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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