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श्री ज्ञानेश्वरी (पारायण प्रात) मराठी - संत ज्ञानेश्वर द्वारा भगवद गीता की व्याख्या | गीता प्रेस गोरखपुर प्रकाशन

श्रीमद्भगवद्गीता (श्रेणी)
एमआरपी120

पुस्तक के बारे में

कोड859
भाषामराठी
पृष्ठों की संख्या 512
पुस्तकाकार पुस्तकाकार (13.5cm*20.32cm)
हार्ड बाउंड MRP 120

विवरण

श्री ज्ञानेश्वरी (पारायण प्रत), गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, भगवद गीता पर सबसे अधिक पूजनीय मराठी विवरण है, जिसे महान संत और दार्शनिक संत ज्ञानेश्वर महाराज (1275–1296) ने मूल रूप से लिखा था। इस पवित्र शास्त्र, जिसे भावार्थ दीपिका के नाम से भी जाना जाता है, भगवान कृष्ण के अर्जुन को दिए गए दिव्य संदेश को सरल और सुंदर तरीके से समझाता है, कर्म योग, भक्तियोग और ज्ञान योग का सार प्रस्तुत करता है।


पारायण संस्करण (पारायण प्रत) विशेष रूप से प्रतिदिन पाठ और अध्ययन के लिए डिज़ाइन किया गया है, जो भक्तों, छात्रों और आध्यात्मिक सच्चाई के खोजकर्ताओं के लिए आदर्श है। स्पष्ट मराठी लिपि में मुद्रित और आसान पठन योग्य, यह मूल मराठी पाठ की भक्तिपूर्ण लय और काव्यात्मक सुंदरता को संरक्षित करता है।


मुख्य विशेषताएँ:

• संत ज्ञानेश्वर द्वारा भगवद गीता पर प्रामाणिक मराठी व्याख्या।

• गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, जो भारत के प्रमुख हिंदू शास्त्र प्रकाशक हैं।

• व्यापक पहुंच के लिए सरल हिंदी लिपि में शामिल।

• जीवन, कर्तव्य, भक्ति और मोक्ष पर गीता की शिक्षाओं को समझाता है।

• प्रतिदिन पाठ (परायण) और आध्यात्मिक ध्यान के लिए आदर्श।

Gita Press Gorakhpur

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