
श्री कृष्ण गीतावली | भाषा: हिंदी | कोड: 110
गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्री कृष्ण-गीतावली मधुर व्रजभाषा में लिखी गई एक मनमोहक और सम्मोहक कविता है। यह भक्तिमय रचना भगवान कृष्ण की कोमल, चंचल और दिव्य लीलाओं का सुंदर चित्रण करती है, जिससे पाठकों को उनकी अतुलनीय सुंदरता और कृपा की झलक मिलती है। ये श्लोक श्री राम और श्री कृष्ण दोनों के प्रति तुलसीदासजी की गहन और एकात्मक भक्ति को भी दर्शाते हैं, जो उन्हें एक ही परम सत्य के विभिन्न स्वरूपों के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनकी कविता गहन प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि को व्यक्त करती है, जिससे यह ग्रंथ भक्तों, आध्यात्मिक साधकों और शास्त्रीय हिंदी साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अनमोल खजाना बन जाता है। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, यह संस्करण स्पष्ट प्रारूप, भक्तिमय कलाकृति और तुलसीदासजी की मूल रचना की प्रामाणिक प्रस्तुति प्रस्तुत करता है। दैनिक पठन, भजन सभाओं, सत्संग और ध्यानमग्न चिंतन के लिए आदर्श, श्री कृष्ण-गीतावली यह पुस्तक पाठक को कृष्ण भक्ति की मधुरता के निकट लाती है। भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं का गुणगान करती एक काव्य रचना, मधुर व्रजभाषा में रचित। मुख्य विशेषताएं : गोस्वामी तुलसीदास की प्रामाणिक रचना - भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं का गुणगान करने वाली एक भक्तिमय काव्य रचना। व्रजभाषा में रचित - मधुर और शास्त्रीय भाषा प्रत्येक श्लोक में मिठास और भक्तिमय गहराई जोड़ती है। एकीकृत भक्ति - तुलसीदास जी के श्री राम और श्री कृष्ण को एक ही दिव्य सार के रूप में प्रेमपूर्ण दृष्टिकोण को उजागर करती है। भक्ति गायन के लिए आदर्श - भजन, सत्संग पाठ और सामूहिक जप के लिए उपयुक्त। सुंदर आध्यात्मिक बिम्ब - सजीव काव्यात्मक वर्णन जो पाठक को कृष्ण की चंचल और दिव्य लीलाओं में लीन कर देता है। उच्च गुणवत्ता वाला गीता प्रेस संस्करण - स्पष्ट मुद्रण, टिकाऊ बंधन और भक्तिमय आवरण चित्र। भक्तों के लिए उत्तम उपहार - कृष्ण भक्तों, तुलसीदास के पाठकों और आध्यात्मिक कविता प्रेमियों के लिए उपयुक्त।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 110
गोस्वामी तुलसीदासजी द्वारा रचित श्री कृष्ण-गीतावली मधुर व्रजभाषा में लिखी गई एक मनमोहक और सम्मोहक कविता है। यह भक्तिमय रचना भगवान कृष्ण की कोमल, चंचल और दिव्य लीलाओं का सुंदर चित्रण करती है, जिससे पाठकों को उनकी अतुलनीय सुंदरता और कृपा की झलक मिलती है।
ये श्लोक श्री राम और श्री कृष्ण दोनों के प्रति तुलसीदासजी की गहन और एकात्मक भक्ति को भी दर्शाते हैं, जो उन्हें एक ही परम सत्य के विभिन्न स्वरूपों के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनकी कविता गहन प्रेम, समर्पण और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि को व्यक्त करती है, जिससे यह ग्रंथ भक्तों, आध्यात्मिक साधकों और शास्त्रीय हिंदी साहित्य के प्रेमियों के लिए एक अनमोल खजाना बन जाता है।
गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, यह संस्करण स्पष्ट प्रारूप, भक्तिमय कलाकृति और तुलसीदासजी की मूल रचना की प्रामाणिक प्रस्तुति प्रस्तुत करता है। दैनिक पठन, भजन सभाओं, सत्संग और ध्यानमग्न चिंतन के लिए आदर्श, श्री कृष्ण-गीतावली यह पुस्तक पाठक को कृष्ण भक्ति की मधुरता के निकट लाती है।
भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं का गुणगान करती एक काव्य रचना, मधुर व्रजभाषा में रचित।
मुख्य विशेषताएं :
गोस्वामी तुलसीदास की प्रामाणिक रचना - भगवान कृष्ण की दिव्य लीलाओं का गुणगान करने वाली एक भक्तिमय काव्य रचना।
व्रजभाषा में रचित - मधुर और शास्त्रीय भाषा प्रत्येक श्लोक में मिठास और भक्तिमय गहराई जोड़ती है।
एकीकृत भक्ति - तुलसीदास जी के श्री राम और श्री कृष्ण को एक ही दिव्य सार के रूप में प्रेमपूर्ण दृष्टिकोण को उजागर करती है।
भक्ति गायन के लिए आदर्श - भजन, सत्संग पाठ और सामूहिक जप के लिए उपयुक्त।
सुंदर आध्यात्मिक बिम्ब - सजीव काव्यात्मक वर्णन जो पाठक को कृष्ण की चंचल और दिव्य लीलाओं में लीन कर देता है।
उच्च गुणवत्ता वाला गीता प्रेस संस्करण - स्पष्ट मुद्रण, टिकाऊ बंधन और भक्तिमय आवरण चित्र।
भक्तों के लिए उत्तम उपहार - कृष्ण भक्तों, तुलसीदास के पाठकों और आध्यात्मिक कविता प्रेमियों के लिए उपयुक्त।
- 64 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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