Shrimad Bhagavad Gita Sadhak Sanjivani Hindi Gita Main

श्रीमद् भगवद् गीता साधक संजीवनी हिंदी – स्वामी रामसुखदास द्वारा टीका | गीता प्रेस गोरखपुर प्रकाशन

श्रीमद्भगवद्गीता (श्रेणी)
एमआरपी450

पुस्तक के बारे में

कोड6
भाषाहिन्दी
पृष्ठों की संख्या 1296
पुस्तकाकार ग्रन्थाकार (18.62cm*27.1cm)
हार्ड बाउंड MRP 450

विवरण

श्रीमद्भगवद्गीता साधक संजीवनी हिंदी, भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच हुए दिव्य संवाद पर सबसे प्रतिष्ठित और प्रामाणिक टीकाओं में से एक है। श्री जयदयाल गोयंदका द्वारा स्पष्टता और भक्ति के साथ रचित और गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित।


यह पुस्तक भगवद्गीता के मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ विस्तृत हिंदी व्याख्याएँ (हिंदी टीकाएँ) प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक प्रत्येक श्लोक के पीछे छिपे वास्तविक अर्थ समझ सकें। यह कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग के मूल आध्यात्मिक सत्यों को उजागर करती है और पाठकों को धार्मिकता, संतुलन और आंतरिक शांति के जीवन की ओर मार्गदर्शन करती है।


मुख्य विशेषताएँ:

• मूल संस्कृत श्लोक, सटीक हिंदी अनुवाद और व्याख्या सहित

• गीता प्रेस के संस्थापक श्री जयदयाल गोयंदका द्वारा लिखित

• गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित - 1923 से भारत का सबसे विश्वसनीय आध्यात्मिक प्रकाशक

• धर्म, आत्म-साक्षात्कार और दिव्य ज्ञान को समझने के लिए एक गहन मार्गदर्शिका

• छात्रों, साधकों और दैनिक आध्यात्मिक अध्ययन के लिए आदर्श

Gita Sadhak Sanjivani (Hindi)

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