श्रीमद्भागवत महापुराण | भाषा: संस्कृत | कोड: 124

पुराण, उपनिषद् आदि (श्रेणी)
एमआरपी150

पुस्तक के बारे में

कोड124
पृष्ठों की संख्या 768
पुस्तकाकार पुस्तकाकार (13.5cm*20.32cm)
हार्ड बाउंड MRP 150

विवरण

"श्रीमद्भागवत महापुराण (स्थूलाक्षरम मूलमंत्रम्)" गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, सनातन धर्म के महानतम ग्रंथों में से एक, दिव्य भागवत महापुराण का एक अत्यंत प्रतिष्ठित संस्कृत संस्करण है।


मोटी और स्पष्ट देवनागरी लिपि (स्थूलाक्षरं) में प्रस्तुत, यह खंड मूल संस्कृत श्लोकों को आसानी से पढ़ने और जपने की सुविधा प्रदान करता है। इसमें मूलमंत्र भी शामिल हैं, जो इसे विद्वानों और भक्तों दोनों के लिए एक प्रामाणिक और आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी ग्रंथ बनाता है।


महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवतम्, भगवान विष्णु और उनके अवतारों, विशेषकर भगवान श्री कृष्ण की दिव्य कथाओं के माध्यम से भक्ति, ज्ञान और धर्म के शाश्वत सत्यों को प्रकट करता है।


यह पवित्र ग्रंथ मन को शुद्ध करता है, आत्मा को उन्नत करता है और व्यक्ति को दिव्य अनुभूति के निकट लाता है।"


श्रीमद्भागवत महापुराण का पवित्र संस्कृत संस्करण, मूल मूलमंत्रों सहित, मोटे अक्षरों में (स्थूलाक्षरम्) गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित - दैनिक पाठ और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए आदर्श।


मुख्य विशेषताएँ :

"• सहज पठन के लिए बड़े, गाढ़े देवनागरी फ़ॉन्ट में मूल संस्कृत पाठ।

• भक्ति पाठ के लिए मूलमंत्र शामिल हैं।

• दैनिक पाठ (पठन), जप या मंदिर में उपयोग के लिए आदर्श।

• प्रामाणिक शास्त्रीय परंपरा को सटीकता के साथ संरक्षित करता है।

• गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, जो 1923 से दुनिया का सबसे विश्वसनीय आध्यात्मिक प्रकाशक है।"

Gita Press Gorakhpur

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