श्री महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित श्रीमद्भागवत महापुराण भाग-5 का 5 | भाषा: गुजराती | कोड: 2160
पुराण, उपनिषद् आदि (श्रेणी)विवरण
"श्रीमद्भागवत महापुराण - पंचम खण्ड" सनातन धर्म साहित्य के अग्रणी नाम, गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित भागवत महापुराण श्रृंखला का एक पवित्र ग्रंथ है।
यह पंचम खण्ड महर्षि वेदव्यास की गहन और आनंदमय शिक्षाओं को प्रस्तुत करता है, जिसमें भगवान विष्णु और भगवान श्री कृष्ण के दिव्य अवतारों, ब्रह्मांडीय व्यवस्था और मोक्ष के सर्वोच्च मार्ग के रूप में भक्ति की सर्वोच्चता पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।
यह ग्रंथ सुंदर चित्रों और स्पष्ट गुजराती भाष्य से सुसज्जित है, जो इसे विद्वानों और भक्तों दोनों के लिए आदर्श बनाता है। यह जीवन के आध्यात्मिक उद्देश्य पर चिंतन को प्रोत्साहित करता है और भागवत पुराण के शाश्वत संदेश के माध्यम से प्रेम, समर्पण और ज्ञान की प्रेरणा देता है।
भागवत पुराण का मुख्य केंद्र ईश्वर के प्रति भक्ति है, विशेष रूप से भगवान कृष्ण की कथाओं और शिक्षाओं के माध्यम से, जो आध्यात्मिक समझ को गहरा करती हैं और प्रेमपूर्ण भक्ति की प्रेरणा देती हैं। यह पुराण दार्शनिक और आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्रदान करता है जो सृष्टि, वास्तविकता की प्रकृति, नैतिक जीवन और सनातन धर्म के अनुसार जीवन के अंतिम उद्देश्य से जुड़े मूलभूत प्रश्नों का समाधान करता है। यह पुराण आध्यात्मिक सत्यों को व्यक्त करने के लिए सम्मोहक आख्यानों का उपयोग करता है, जिससे यह एक साहित्यिक कृति और आध्यात्मिक एवं धार्मिक अंतर्दृष्टियों से परे जीवन के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शक दोनों बन जाता है।
श्रीमद्भागवत महापुराण के पाँचवें भाग पर एक सचित्र गुजराती टीका, जो भगवान कृष्ण की दिव्य कथाओं और भक्ति, ज्ञान और धर्म के परम सत्य का वर्णन करती है।
मुख्य विशेषताएँ :
• सरल और विश्वसनीय गुजराती टीका।
• बेहतर समझ के लिए भक्तिमय रंगीन चित्र शामिल हैं।
• भक्ति योग, ज्ञान योग और भगवान विष्णु एवं कृष्ण की दिव्य लीलाओं की व्याख्या करता है।
• गीता प्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, 1923 से सटीकता और आध्यात्मिक गहराई के लिए प्रसिद्ध।
• दैनिक पठन, सत्संग अध्ययन और आध्यात्मिक प्रतिभा के लिए उत्तम।

