व्यवहार में परमार्थ की कला

श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके शीघ्र कल्याणकारी प्रकाशन (श्रेणी)
एमआरपी25

पुस्तक के बारे में

कोड254
भाषाहिन्दी
पृष्ठों की संख्या 208
पुस्तकाकार पुस्तकाकार (13.5cm*20.32cm)

विवरण

पूर्व प्रकाशित सरल एवं व्यावहारिक शिक्षाप्रद लेखों के इस ग्रन्थाकार संकलन में गीता-रामायण आदि ग्रन्थों के सार तत्त्वों का संग्रह है। इसके अध्ययन से साधन-सम्बन्धी सभी जिज्ञासाओं का सहज ही समाधान हो जाता है। यह प्रत्येक घर में अवश्य रखने एवं उपहार में देनेयोग्य एक कल्याणकारी ग्रन्थ है।

Shri Jayadayal Ji Goyendka

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