
आदर्श उपकार (पढ़ो, समझो और करो) | गीता प्रेस, गोरखपुर | आदर्श उपकार (पढ़ो, समझो और करो) | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 159
यह पुस्तक कल्याण में समय-समय पर प्रकाशित सत्य घटनाओं का प्रेरक प्रसंगों के रूपमें ऐसा मार्मिक चित्रण है कि इसे पढ़ते-पढ़ते आँखों से प्रेमाश्रु छलक पड़ें। आदर्श उपकार, स्वप्न के स्वरूप में सत्य, बहू की बुद्धि, विद्यालय की मित्रता आदि 48 प्रसंगों के रूपमें वर्णित ये प्रेरक-प्रसंग पठनीय तथा अनुकरणीय हैं।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 159
यह पुस्तक कल्याण में समय-समय पर प्रकाशित सत्य घटनाओं का प्रेरक प्रसंगों के रूपमें ऐसा मार्मिक चित्रण है कि इसे पढ़ते-पढ़ते आँखों से प्रेमाश्रु छलक पड़ें। आदर्श उपकार, स्वप्न के स्वरूप में सत्य, बहू की बुद्धि, विद्यालय की मित्रता आदि 48 प्रसंगों के रूपमें वर्णित ये प्रेरक-प्रसंग पठनीय तथा अनुकरणीय हैं।
- 160 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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