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आनन्दमय जीवन | गीता प्रेस, गोरखपुर | आनन्दमय जीवन | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 120
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मनुष्य अपने-आप में एक दैवी शक्ति-सम्पन्न आत्मा है। उसके कण-कण में आनन्द का दिव्य प्रवाह है। डॉ. रामचरण महेन्द्र के ओजस्वी विचारों के रूपमें संकलित यह पुस्तक आध्यात्मिक पथ की परियिका तथा मानव-जीवन में आनन्दमय वातावरण को विकसित करनेवाली है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 120
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मनुष्य अपने-आप में एक दैवी शक्ति-सम्पन्न आत्मा है। उसके कण-कण में आनन्द का दिव्य प्रवाह है। डॉ. रामचरण महेन्द्र के ओजस्वी विचारों के रूपमें संकलित यह पुस्तक आध्यात्मिक पथ की परियिका तथा मानव-जीवन में आनन्दमय वातावरण को विकसित करनेवाली है।
- 176 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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