
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके शीघ्र कल्याणकारी प्रकाशन
आत्मोद्धार के साधन (भाग - १) | गीता प्रेस, गोरखपुर | आत्मोद्धार के साधन (भाग - १) | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 245
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इस पुस्तक में ब्रह्मलीन श्री जयदयाल जी गोयन्दका द्वारा समय-समय पर लिखे गये मनुष्य मात्र के उद्धार-हेतु मार्मिक लेखों का एक अनुपम संग्रह, जिसमें गुरु-भक्ति, मातृ-पितृ भक्ति, ईश्वर-भक्ति, पातिव्रत्य धर्म आदि विषयों को प्रेरणादायक उदाहरणों के द्वारा समझाया गया है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 245
टैग:Shri Jayadayal Ji Goyendka
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इस पुस्तक में ब्रह्मलीन श्री जयदयाल जी गोयन्दका द्वारा समय-समय पर लिखे गये मनुष्य मात्र के उद्धार-हेतु मार्मिक लेखों का एक अनुपम संग्रह, जिसमें गुरु-भक्ति, मातृ-पितृ भक्ति, ईश्वर-भक्ति, पातिव्रत्य धर्म आदि विषयों को प्रेरणादायक उदाहरणों के द्वारा समझाया गया है।
- 224 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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