
ब्रह्मचर्यलक्षण अर्थात् श्री अनुसूया चरित्र एवं गाथा | गीता प्रेस, गोरखपुर | ब्रह्मचर्यलक्षण अर्थात श्री अनुसूया चरित्र | मराठी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 1931
ब्रह्मचर्यलक्षण अर्थात् श्री अनुसूया चरित्र एवं गाथा एक आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी हिंदू ग्रंथ है जो सनातन धर्म की सबसे पूजनीय महिला संतों में से एक, माता अनुसूया के प्रेरक जीवन वृत्तांत के माध्यम से ब्रह्मचर्य (संयम और आत्म-संयम) के सच्चे अर्थ, अनुशासन और आंतरिक मूल्यों को प्रस्तुत करता है। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक शास्त्रोक्त शिक्षाओं, भक्ति कथा और नैतिक उपदेशों का मिश्रण है, जो यह समझाती है कि आचरण की पवित्रता, इंद्रियों पर संयम, विनम्रता और भक्ति किस प्रकार आध्यात्मिक शक्ति और दिव्य कृपा की ओर ले जाती है। माता अनुसूया के जीवन को केवल एक कहानी के रूप में नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य के पालन के एक जीवंत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो इसे संन्यासियों और गृहस्थों दोनों के लिए प्रासंगिक बनाता है। प्रमुख विशेषताऐं यह पुस्तक बताती है कि ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक संयम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विचार, वाणी और कर्म की शुद्धता भी शामिल है, और यह अनुशासन किस प्रकार शांति, स्पष्टता, आध्यात्मिक शक्ति और नैतिक उत्कृष्टता की ओर ले जाता है। सरल लेकिन पारंपरिक शैली में लिखी गई यह पुस्तक चरित्र निर्माण और आध्यात्मिक मार्गदर्शन चाहने वाले सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयुक्त है। यह पुस्तक ब्रह्मचर्य के गहन अर्थ को स्पष्ट करती है, जो केवल ब्रह्मचर्य से कहीं अधिक है। यह एक पूजनीय महिला संत के जीवन के माध्यम से नैतिक अनुशासन को प्रेरित करती है। यह दैनिक जीवन में पवित्रता, आत्म-संयम और भक्ति को प्रोत्साहित करती है। यह चरित्र और आध्यात्मिक संकल्प को मजबूत करती है। यह आध्यात्मिक अध्ययन, चिंतन और मूल्य शिक्षा के लिए आदर्श है।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 1931
ब्रह्मचर्यलक्षण अर्थात् श्री अनुसूया चरित्र एवं गाथा एक आध्यात्मिक रूप से उत्थानकारी हिंदू ग्रंथ है जो सनातन धर्म की सबसे पूजनीय महिला संतों में से एक, माता अनुसूया के प्रेरक जीवन वृत्तांत के माध्यम से ब्रह्मचर्य (संयम और आत्म-संयम) के सच्चे अर्थ, अनुशासन और आंतरिक मूल्यों को प्रस्तुत करता है। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक शास्त्रोक्त शिक्षाओं, भक्ति कथा और नैतिक उपदेशों का मिश्रण है, जो यह समझाती है कि आचरण की पवित्रता, इंद्रियों पर संयम, विनम्रता और भक्ति किस प्रकार आध्यात्मिक शक्ति और दिव्य कृपा की ओर ले जाती है। माता अनुसूया के जीवन को केवल एक कहानी के रूप में नहीं, बल्कि गृहस्थ जीवन में ब्रह्मचर्य के पालन के एक जीवंत उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जो इसे संन्यासियों और गृहस्थों दोनों के लिए प्रासंगिक बनाता है।
प्रमुख विशेषताऐं
यह पुस्तक बताती है कि ब्रह्मचर्य केवल शारीरिक संयम तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विचार, वाणी और कर्म की शुद्धता भी शामिल है, और यह अनुशासन किस प्रकार शांति, स्पष्टता, आध्यात्मिक शक्ति और नैतिक उत्कृष्टता की ओर ले जाता है।
सरल लेकिन पारंपरिक शैली में लिखी गई यह पुस्तक चरित्र निर्माण और आध्यात्मिक मार्गदर्शन चाहने वाले सभी आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयुक्त है।
यह पुस्तक ब्रह्मचर्य के गहन अर्थ को स्पष्ट करती है, जो केवल ब्रह्मचर्य से कहीं अधिक है।
यह एक पूजनीय महिला संत के जीवन के माध्यम से नैतिक अनुशासन को प्रेरित करती है।
यह दैनिक जीवन में पवित्रता, आत्म-संयम और भक्ति को प्रोत्साहित करती है।
यह चरित्र और आध्यात्मिक संकल्प को मजबूत करती है।
यह आध्यात्मिक अध्ययन, चिंतन और मूल्य शिक्षा के लिए आदर्श है।
- 560 पृष्ठ
- भाषा: मराठी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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