
श्री जयदयाल जी गोयन्दका द्वारा गीता तत्व विवेचनी | भाषा: असमिया | कोड: 2298
श्रीमद्भगवद्गीता - तत्व विवेचनी, भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच दिव्य संवाद पर सबसे प्रतिष्ठित और प्रामाणिक टीकाओं में से एक है, जिसे श्री जयदयाल जी गोयंदका ने स्पष्टता और भक्ति के साथ रचा है और गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित किया गया है। यह पुस्तक भगवद्गीता के मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ विस्तृत असमिया व्याख्याएँ प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक प्रत्येक श्लोक के पीछे के वास्तविक अर्थ को समझ सकें। यह कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग के मूल आध्यात्मिक सत्यों को उजागर करती है और पाठकों को धार्मिकता, संतुलन और आंतरिक शांति के जीवन की ओर मार्गदर्शन करती है। श्री जयदयाल जी गोयंदका द्वारा भगवद्गीता पर एक गहन अंतर्दृष्टिपूर्ण असमिया टीका, जिसे गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित किया गया है - भगवान कृष्ण की शिक्षाओं के आध्यात्मिक सार और शाश्वत ज्ञान को प्रकट करती है। मुख्य विशेषताएँ: • मूल संस्कृत श्लोक, सटीक असमिया अनुवाद और भाष्य सहित • गीता प्रेस के संस्थापक श्री जयदयाल जी गोयंदका द्वारा लिखित • गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित - 1923 से भारत का सबसे विश्वसनीय आध्यात्मिक प्रकाशक • धर्म, आत्म-साक्षात्कार और दिव्य ज्ञान को समझने के लिए एक गहन मार्गदर्शिका • दैनिक आध्यात्मिक अध्ययन हेतु अनुभवी साधकों के लिए आदर्श
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एसकेयू: 2298
श्रीमद्भगवद्गीता - तत्व विवेचनी, भगवान कृष्ण और अर्जुन के बीच दिव्य संवाद पर सबसे प्रतिष्ठित और प्रामाणिक टीकाओं में से एक है, जिसे श्री जयदयाल जी गोयंदका ने स्पष्टता और भक्ति के साथ रचा है और गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित किया गया है।
यह पुस्तक भगवद्गीता के मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ विस्तृत असमिया व्याख्याएँ प्रस्तुत करती है, जिससे पाठक प्रत्येक श्लोक के पीछे के वास्तविक अर्थ को समझ सकें। यह कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग के मूल आध्यात्मिक सत्यों को उजागर करती है और पाठकों को धार्मिकता, संतुलन और आंतरिक शांति के जीवन की ओर मार्गदर्शन करती है।
श्री जयदयाल जी गोयंदका द्वारा भगवद्गीता पर एक गहन अंतर्दृष्टिपूर्ण असमिया टीका, जिसे गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित किया गया है - भगवान कृष्ण की शिक्षाओं के आध्यात्मिक सार और शाश्वत ज्ञान को प्रकट करती है।
मुख्य विशेषताएँ:
• मूल संस्कृत श्लोक, सटीक असमिया अनुवाद और भाष्य सहित
• गीता प्रेस के संस्थापक श्री जयदयाल जी गोयंदका द्वारा लिखित
• गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित - 1923 से भारत का सबसे विश्वसनीय आध्यात्मिक प्रकाशक
• धर्म, आत्म-साक्षात्कार और दिव्य ज्ञान को समझने के लिए एक गहन मार्गदर्शिका
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- भाषा: असमिया
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