
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके शीघ्र कल्याणकारी प्रकाशन
मनुष्य का परमकर्तव्य (भाग १) | गीता प्रेस, गोरखपुर | मनुष्य का परमकर्तव्य (भाग १) | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 246
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ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्री जयदयाल जी गोयन्दका के द्वारा प्रणीत इस पुस्तक में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, संयम, वर्णाश्रम-धर्म, सत्य, श्रद्धा, समता, भगवत्प्रेम, प्रारब्ध और पुरुषार्थ आदि आध्यात्मिक विषयों पर सुन्दर विवेचन किया गया है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 246
टैग:Shri Jayadayal Ji Goyendka
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ब्रह्मलीन परम श्रद्धेय श्री जयदयाल जी गोयन्दका के द्वारा प्रणीत इस पुस्तक में भक्ति, ज्ञान, वैराग्य, संयम, वर्णाश्रम-धर्म, सत्य, श्रद्धा, समता, भगवत्प्रेम, प्रारब्ध और पुरुषार्थ आदि आध्यात्मिक विषयों पर सुन्दर विवेचन किया गया है।
- 192 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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