
नित्यकर्म-पूजा प्रकाशिका | दैनिक हिन्दू कर्मकाण्ड और पूजा विधि की सम्पूर्ण मार्गदर्शिका | गीता प्रेस, गोरखपुर | నిత్యకర్మ పూజా ప్రకాశికా (తెలుగు) | तेलुगु |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 1921
गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित नित्य कर्म-पूजा प्रकाशिका (तेलुगु) पारंपरिक धर्म के अनुसार दैनिक हिंदू अनुष्ठानों को संपन्न करने के लिए एक व्यापक और प्रामाणिक मार्गदर्शिका है। यह पुस्तक नित्य कर्म, संध्यावंदन, देवता पूजा विधियाँ, व्रत और आवश्यक पूजा पद्धतियों की स्पष्ट व्याख्या करती है, जो एक भक्त के आध्यात्मिक जीवन की नींव हैं। सरल और सटीक तेलुगु भाषा में तैयार की गई यह पुस्तक प्रत्येक अनुष्ठान का चरण-दर-चरण वर्णन करती है, जिससे नौसिखियों, गृहस्थों, पुजारियों और धर्मशास्त्र के छात्रों के लिए इसका पालन करना आसान हो जाता है। यह सुनिश्चित करती है कि पाठक न केवल विधि को समझें, बल्कि प्रत्येक कर्म के उद्देश्य, महत्व और अनुशासन को भी समझें। प्रमुख विशेषताऐं यह ग्रंथ स्मृतियों और पारंपरिक गृह्य प्रथाओं से प्राप्त शास्त्रोक्त सिद्धांतों का पूर्णतया पालन करता है। गीता प्रेस की प्रसिद्ध स्पष्टता, प्रारूपण और आध्यात्मिक प्रामाणिकता के साथ, यह पुस्तक दैनिक उपासना को सही ढंग से और भक्तिपूर्वक करने के लिए जीवनभर का साथी बन जाती है। यह पुस्तक संध्यावंदन, जप और उपासना जैसे नित्य कर्मों के उचित निष्पादन को सक्षम बनाती है। संरचित दैनिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन को मजबूत करती है। प्रामाणिक शास्त्रों में वर्णित धर्म परंपराओं की सही समझ विकसित करती है। निर्देशित पूजा विधियों के माध्यम से एकाग्रता, भक्ति और मानसिक स्पष्टता में सुधार करती है। पारिवारिक परंपरा का समर्थन करती है, जिससे अगली पीढ़ी को सही विधियाँ सीखने में मदद मिलती है। गृहस्थों, छात्रों और नौसिखियों के लिए उपयोगी है, चाहे उन्हें पहले से अनुष्ठान का ज्ञान हो या न हो। मंदिरों और पुरोहितों के संदर्भ के लिए आदर्श है, जो उपासना में शास्त्रोक्त सटीकता सुनिश्चित करती है।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 1921
गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित नित्य कर्म-पूजा प्रकाशिका (तेलुगु) पारंपरिक धर्म के अनुसार दैनिक हिंदू अनुष्ठानों को संपन्न करने के लिए एक व्यापक और प्रामाणिक मार्गदर्शिका है। यह पुस्तक नित्य कर्म, संध्यावंदन, देवता पूजा विधियाँ, व्रत और आवश्यक पूजा पद्धतियों की स्पष्ट व्याख्या करती है, जो एक भक्त के आध्यात्मिक जीवन की नींव हैं। सरल और सटीक तेलुगु भाषा में तैयार की गई यह पुस्तक प्रत्येक अनुष्ठान का चरण-दर-चरण वर्णन करती है, जिससे नौसिखियों, गृहस्थों, पुजारियों और धर्मशास्त्र के छात्रों के लिए इसका पालन करना आसान हो जाता है। यह सुनिश्चित करती है कि पाठक न केवल विधि को समझें, बल्कि प्रत्येक कर्म के उद्देश्य, महत्व और अनुशासन को भी समझें।
प्रमुख विशेषताऐं
यह ग्रंथ स्मृतियों और पारंपरिक गृह्य प्रथाओं से प्राप्त शास्त्रोक्त सिद्धांतों का पूर्णतया पालन करता है।
गीता प्रेस की प्रसिद्ध स्पष्टता, प्रारूपण और आध्यात्मिक प्रामाणिकता के साथ, यह पुस्तक दैनिक उपासना को सही ढंग से और भक्तिपूर्वक करने के लिए जीवनभर का साथी बन जाती है। यह पुस्तक संध्यावंदन, जप और उपासना जैसे नित्य कर्मों के उचित निष्पादन को सक्षम बनाती है।
संरचित दैनिक अनुष्ठानों के माध्यम से आध्यात्मिक अनुशासन को मजबूत करती है।
प्रामाणिक शास्त्रों में वर्णित धर्म परंपराओं की सही समझ विकसित करती है।
निर्देशित पूजा विधियों के माध्यम से एकाग्रता, भक्ति और मानसिक स्पष्टता में सुधार करती है।
पारिवारिक परंपरा का समर्थन करती है, जिससे अगली पीढ़ी को सही विधियाँ सीखने में मदद मिलती है।
गृहस्थों, छात्रों और नौसिखियों के लिए उपयोगी है, चाहे उन्हें पहले से अनुष्ठान का ज्ञान हो या न हो।
मंदिरों और पुरोहितों के संदर्भ के लिए आदर्श है, जो उपासना में शास्त्रोक्त सटीकता सुनिश्चित करती है।
- 832 पृष्ठ
- भाषा: तेलुगू
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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