
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके शीघ्र कल्याणकारी प्रकाशन
गीता प्रेस, गोरखपुर | गीता प्रेस | गीता प्रेस, गोरखपुर | परम साधना | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 243
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इस पुस्तक में आबाल-वृद्ध-हेतु हर प्रकार के उन्नति के साधनों का निरूपण करते हुए भगवत्प्राप्ति में मनुष्यमात्र का अधिकार, सत्यपालन, स्त्री-बालकों-हेतु कर्तव्य-शिक्षा एवं शिक्षाप्रद कहानियों के संग्रह के साथ गीता-रामायण की महत्ता का सरल प्रतिपादन है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 243
टैग:Shri Jayadayal Ji Goyendka
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इस पुस्तक में आबाल-वृद्ध-हेतु हर प्रकार के उन्नति के साधनों का निरूपण करते हुए भगवत्प्राप्ति में मनुष्यमात्र का अधिकार, सत्यपालन, स्त्री-बालकों-हेतु कर्तव्य-शिक्षा एवं शिक्षाप्रद कहानियों के संग्रह के साथ गीता-रामायण की महत्ता का सरल प्रतिपादन है।
- 192 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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