
पुराण, उपनिषद् आदि
योग दर्शन | गीता प्रेस, गोरखपुर | योग दर्शन | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 135
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योगदर्शन साधकों के लिये अत्यन्त उपयोगी और महत्त्वपूर्ण शास्त्र है। प्रस्तुत पुस्तक में महर्षि पतञ्जलि कृत योगदर्शन का सम्पूर्ण मूल, प्रत्येक सूत्र का एक-दूसरे से सम्बन्ध एवं शब्दार्थ के साथ श्री हरिकृष्णदास जी गोयन्दका कृत सरल एवं सुबोध व्याख्या है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 135
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योगदर्शन साधकों के लिये अत्यन्त उपयोगी और महत्त्वपूर्ण शास्त्र है। प्रस्तुत पुस्तक में महर्षि पतञ्जलि कृत योगदर्शन का सम्पूर्ण मूल, प्रत्येक सूत्र का एक-दूसरे से सम्बन्ध एवं शब्दार्थ के साथ श्री हरिकृष्णदास जी गोयन्दका कृत सरल एवं सुबोध व्याख्या है।
- 144 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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