
श्रध्देय स्वामी श्रीरामसुखदासजीके कल्याणकारी साहित्य
शरणागति | गीता प्रेस, गोरखपुर | शरणागति | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 434
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सच्चे हृदय से भगवच्छरणागति की स्वीकृति हो जाने पर चिन्ता, भय, शोक आदि दोषों का अपने-आप उपशमन हो जाता है। इस दिव्य भाव को दृढ़ कराने वाला स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज कृत एक सुन्दर विवेचन
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 434
टैग:Swami Ramsukhdas Ji
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सच्चे हृदय से भगवच्छरणागति की स्वीकृति हो जाने पर चिन्ता, भय, शोक आदि दोषों का अपने-आप उपशमन हो जाता है। इस दिव्य भाव को दृढ़ कराने वाला स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज कृत एक सुन्दर विवेचन
- 64 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
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