
परम श्रध्देय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार (भाईजी )-के अनमोल प्रकाशन
सुख शान्ति का मार्ग | गीता प्रेस, गोरखपुर | सुख शान्ति का मार्ग | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 333
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मनुष्य जब तक दूसरे व्यक्ति, वस्तु, परिस्थिति, स्थान में सुख और शान्ति की तलाश करने का प्रयास करता है तब तक उसके हाथ दैन्य, निराशा और विषाद ही लगता है। वास्तविक सुख-शान्ति प्रभु की भक्ति तथा प्राप्ति में ही है। इस पुस्तक में भक्ति और उसकी प्राप्ति के विभिन्न आयामों की विस्तृत चर्चा की गयी है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 333
टैग:Shri Hanuman Prasad Ji Poddar
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मनुष्य जब तक दूसरे व्यक्ति, वस्तु, परिस्थिति, स्थान में सुख और शान्ति की तलाश करने का प्रयास करता है तब तक उसके हाथ दैन्य, निराशा और विषाद ही लगता है। वास्तविक सुख-शान्ति प्रभु की भक्ति तथा प्राप्ति में ही है। इस पुस्तक में भक्ति और उसकी प्राप्ति के विभिन्न आयामों की विस्तृत चर्चा की गयी है।
- 304 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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