
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके शीघ्र कल्याणकारी प्रकाशन
भगवान के रहने के पाँच स्थान | गीता प्रेस, गोरखपुर | भगवान के रहने के पाँच स्थान | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 261
तुरंत पढ़ेंउपलब्ध है
₹10
इस पुस्तक में पद्मपुराण-सृष्टिखण्ड से संकलित सर्वव्यापक भगवान की उपलब्धि के विषय में मूक चाण्डाल, तुलाधार वैश्य, नरोत्तम ब्राह्मण इत्यादि पाँच कथाओं के माध्यम से तात्त्विक व्याख्या की गयी है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 261
टैग:Shri Jayadayal Ji Goyendka
शेयर करना:
इस पुस्तक में पद्मपुराण-सृष्टिखण्ड से संकलित सर्वव्यापक भगवान की उपलब्धि के विषय में मूक चाण्डाल, तुलाधार वैश्य, नरोत्तम ब्राह्मण इत्यादि पाँच कथाओं के माध्यम से तात्त्विक व्याख्या की गयी है।
- 48 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
त्वरित शिपिंग
पूरे भारत में डिलीवरी
सुविधाजनक भुगतान
यूपीआई, कार्ड और कैश ऑन डिलीवरी
24x7 सहायता
हम आपकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं