
भगवान के रहने के पाँच स्थान
भगवान के रहने के पाँच स्थान · हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 261 · हिन्दी
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इस पुस्तक में पद्मपुराण-सृष्टिखण्ड से संकलित सर्वव्यापक भगवान की उपलब्धि के विषय में मूक चाण्डाल, तुलाधार वैश्य, नरोत्तम ब्राह्मण इत्यादि पाँच कथाओं के माध्यम से तात्त्विक व्याख्या की गयी है।
भाषा · 7 भाषाओं में उपलब्ध
प्रारूप
एसकेयू: 261
अन्य भाषाओं में उपलब्ध: गुजराती, कन्नड़, मराठी, ओड़िया, तमिल, तेलुगू
इस पुस्तक में पद्मपुराण-सृष्टिखण्ड से संकलित सर्वव्यापक भगवान की उपलब्धि के विषय में मूक चाण्डाल, तुलाधार वैश्य, नरोत्तम ब्राह्मण इत्यादि पाँच कथाओं के माध्यम से तात्त्विक व्याख्या की गयी है।
- 48 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
7 संस्करण · 7 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| भगवान के रहने के पाँच स्थान | गुजराती | 48 | 889 | ₹8 |
| भगवान के रहने के पाँच स्थान (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 48 | 261 | ₹10 |
| भगवान के रहने के पाँच स्थान | कन्नड़ | 48 | 839 | ₹6 |
| भगवान के रहने के पाँच स्थान | मराठी | 48 | 1334 | ₹10 |
| भगवान के रहने के पाँच स्थान | ओड़िया | 48 | 1252 | ₹6 |
| भगवान के रहने के पाँच स्थान | तमिल | 80 | 643 | ₹8 |
| भगवान के रहने के पाँच स्थान | तेलुगू | 64 | 689 | ₹15 |
भगवान के रहने के पाँच स्थान · गुजरातीकोड 889 · 48 पृष्ठ · ₹8

भगवान के रहने के पाँच स्थान · हिन्दी
कोड 261 · 48 पृष्ठ · ₹10 · यह पृष्ठ
भगवान के रहने के पाँच स्थान · कन्नड़कोड 839 · 48 पृष्ठ · ₹6
भगवान के रहने के पाँच स्थान · मराठीकोड 1334 · 48 पृष्ठ · ₹10
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