
श्री भाईजी हनुमानप्रसादजी पोद्दार जी
सन्त-वाणी
सन्त-वाणी · हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 342 · हिन्दी
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त्रिताप-सन्तप्त संसार को मुक्ति रूप निरतिशय आनन्द का सन्देश देकर शान्ति प्रदान करने वाले प्रायः सभी देश जाति के विभिन्न सन्तों के उपदेशात्मक सूक्तियों का सुन्दर संकलन।
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त्रिताप-सन्तप्त संसार को मुक्ति रूप निरतिशय आनन्द का सन्देश देकर शान्ति प्रदान करने वाले प्रायः सभी देश जाति के विभिन्न सन्तों के उपदेशात्मक सूक्तियों का सुन्दर संकलन।
- 288 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
2 संस्करण · 2 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| सन्त-वाणी (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 288 | 342 | ₹40 |
| सन्तवाणी भाग-1 | तमिल | 128 | 850 | ₹15 |

सन्त-वाणी · हिन्दी
कोड 342 · 288 पृष्ठ · ₹40 · यह पृष्ठ
सन्तवाणी भाग-1 · तमिलकोड 850 · 128 पृष्ठ · ₹15
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