
आनंद की लहरें
आनंद की लहरें · हिंदी · आकार: छोटा (पॉकेट साइज़) · कोड: 378 · हिन्दी
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मनुष्य अपने व्यवहार द्वारा एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहयोगी बनकर किस प्रकार इस धरा-धाम को स्वर्गीय सुख में परिवर्तित कर सकता है, इस विषय को गोलोकवासी श्री हनुमानप्रसाद जी पोद्दार द्वारा प्रणीत इस पुस्तक में बड़े ही सुन्दर ढंग से समझाया गया है।
प्रारूप
एसकेयू: 378
अन्य भाषाओं में उपलब्ध: बाँग्ला, गुजराती, ओड़िया
मनुष्य अपने व्यवहार द्वारा एक-दूसरे के सुख-दुःख में सहयोगी बनकर किस प्रकार इस धरा-धाम को स्वर्गीय सुख में परिवर्तित कर सकता है, इस विषय को गोलोकवासी श्री हनुमानप्रसाद जी पोद्दार द्वारा प्रणीत इस पुस्तक में बड़े ही सुन्दर ढंग से समझाया गया है।
- 64 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
4 संस्करण · 4 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| मन का नियंत्रण और आनन्द की लहरें | बाँग्ला | 64 | 1795 | ₹10 |
| आनन्द की लहरें | गुजराती | 64 | 1049 | ₹5 |
| आनंद की लहरें (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 64 | 378 | ₹7 |
| आनंद की लहरें (उड़िया) | ओड़िया | 64 | 1011 | ₹4 |
मन का नियंत्रण और आनन्द की लहरें · बाँग्लाकोड 1795 · 64 पृष्ठ · ₹10
आनन्द की लहरें · गुजरातीकोड 1049 · 64 पृष्ठ · ₹5

आनंद की लहरें · हिन्दी
कोड 378 · 64 पृष्ठ · ₹7 · यह पृष्ठ
आनंद की लहरें (उड़िया) · ओड़ियाकोड 1011 · 64 पृष्ठ · ₹4
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