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हनुमानबाहुक | गीता प्रेस, गोरखपुर | हनुमानबाहुक | हिंदी |आकार: छोटा (पॉकेट साइज़) |कोड: 112
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गोस्वामी जी के द्वारा विरचित यह स्तुत्यात्मक काव्य त्रिताप-निवारक तथा श्रीहनुमान जी की प्रसन्नता-हेतु सबल आधार है। इसके पाठ से आपत्तियों का शमन एवं हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 112
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गोस्वामी जी के द्वारा विरचित यह स्तुत्यात्मक काव्य त्रिताप-निवारक तथा श्रीहनुमान जी की प्रसन्नता-हेतु सबल आधार है। इसके पाठ से आपत्तियों का शमन एवं हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।
- 64 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
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