जित देखूं तित तू (हिन्दी)

श्रध्देय स्वामी श्रीरामसुखदासजीके कल्याणकारी साहित्य (श्रेणी)
एमआरपी25

पुस्तक के बारे में

कोड605
भाषाहिन्दी
पृष्ठों की संख्या 144
पुस्तकाकार पुस्तकाकार (13.5cm*20.32cm)

विवरण

इस पुस्तक में सब कुछ भगवान् ही हैं; गीता के इस महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त का प्रतिपादन करते हुए श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज ने भक्ति की श्रेष्ठता, अनिर्वचनीय प्रेम, संयोग, वियोग और योग आदि अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों पर उपयोगी दृष्टान्तों के माध्यम से सुन्दर विवेचन किया है।

Swami Ramsukhdas Ji

संबंधित उत्पाद


ब्राउज़िंग इतिहास