
श्री नृसिंह पुराण | गीता प्रेस, गोरखपुर | શ્રી નૃસિંહ પુરાણ | गुजराती |आकार: बड़ा (ग्रन्थाकार) |कोड: 2218
श्री नरसिंह पुराण हिंदू परंपरा के पूजनीय महापुराणों में से एक है, जिसे महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित माना जाता है। यह पवित्र ग्रंथ भगवान नरसिंह के दिव्य अवतार पर केंद्रित है, जो भगवान विष्णु का उग्र लेकिन करुणामय रूप है, जो धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए प्रकट होते हैं। यह संस्करण पुराण को संवाद-आधारित कथा शैली में प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक रूप से भक्ति, कर्तव्य, नैतिक आचरण और आध्यात्मिक मुक्ति पर गहन संवादों के माध्यम से व्यक्त की जाती है। इसमें सर्वोच्च सत्ता में अटूट आस्था, भक्ति की शक्ति और सच्चे भक्तों के लिए दिव्य संरक्षण के आश्वासन पर बल दिया गया है। प्रमुख विशेषताऐं स्पष्ट और सरल गुजराती अनुवाद में, चित्रों सहित, प्रस्तुत यह पुस्तक गहन दार्शनिक और भक्तिमय शिक्षाओं को व्यापक पाठक वर्ग के लिए सुलभ बनाती है। इसमें ब्रह्मांड विज्ञान, राजाओं और गृहस्थों के कर्तव्य, नैतिक जीवन, भक्तिमय अभ्यास और परम आश्रय के रूप में विष्णु की सर्वोच्चता जैसे विषय शामिल हैं। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, जो प्रामाणिकता और शुद्धता के लिए विश्व स्तर पर सम्मानित संस्था है, यह पुस्तक दैनिक पठन, पारायण, सत्संग और शास्त्र अध्ययन के लिए आदर्श है। यह भक्तों, आध्यात्मिक साधकों और शास्त्रीय हिंदू शास्त्रों में रुचि रखने वाले पाठकों को समान रूप से आकर्षित करती है। यह पुस्तक भगवान विष्णु और भगवान नरसिम्हा में आस्था को मजबूत करती है। धर्म, भक्ति और मोक्ष के मूल सिद्धांतों की व्याख्या करती है। एक शास्त्रीय पुराण को गुजराती भाषा में सुलभ बनाती है। नैतिक जीवन और आध्यात्मिक अनुशासन को प्रोत्साहित करती है। भक्तिपूर्ण पठन और पारिवारिक अध्ययन के लिए आदर्श है।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 2218
श्री नरसिंह पुराण हिंदू परंपरा के पूजनीय महापुराणों में से एक है, जिसे महर्षि वेदव्यास द्वारा रचित माना जाता है। यह पवित्र ग्रंथ भगवान नरसिंह के दिव्य अवतार पर केंद्रित है, जो भगवान विष्णु का उग्र लेकिन करुणामय रूप है, जो धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए प्रकट होते हैं। यह संस्करण पुराण को संवाद-आधारित कथा शैली में प्रस्तुत करता है, जो पारंपरिक रूप से भक्ति, कर्तव्य, नैतिक आचरण और आध्यात्मिक मुक्ति पर गहन संवादों के माध्यम से व्यक्त की जाती है। इसमें सर्वोच्च सत्ता में अटूट आस्था, भक्ति की शक्ति और सच्चे भक्तों के लिए दिव्य संरक्षण के आश्वासन पर बल दिया गया है।
प्रमुख विशेषताऐं
स्पष्ट और सरल गुजराती अनुवाद में, चित्रों सहित, प्रस्तुत यह पुस्तक गहन दार्शनिक और भक्तिमय शिक्षाओं को व्यापक पाठक वर्ग के लिए सुलभ बनाती है।
इसमें ब्रह्मांड विज्ञान, राजाओं और गृहस्थों के कर्तव्य, नैतिक जीवन, भक्तिमय अभ्यास और परम आश्रय के रूप में विष्णु की सर्वोच्चता जैसे विषय शामिल हैं। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित, जो प्रामाणिकता और शुद्धता के लिए विश्व स्तर पर सम्मानित संस्था है, यह पुस्तक दैनिक पठन, पारायण, सत्संग और शास्त्र अध्ययन के लिए आदर्श है।
यह भक्तों, आध्यात्मिक साधकों और शास्त्रीय हिंदू शास्त्रों में रुचि रखने वाले पाठकों को समान रूप से आकर्षित करती है।
यह पुस्तक भगवान विष्णु और भगवान नरसिम्हा में आस्था को मजबूत करती है।
धर्म, भक्ति और मोक्ष के मूल सिद्धांतों की व्याख्या करती है।
एक शास्त्रीय पुराण को गुजराती भाषा में सुलभ बनाती है।
नैतिक जीवन और आध्यात्मिक अनुशासन को प्रोत्साहित करती है।
भक्तिपूर्ण पठन और पारिवारिक अध्ययन के लिए आदर्श है।
- 304 पृष्ठ
- भाषा: गुजराती
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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