परम शांति का मार्ग (भाग I)

श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके शीघ्र कल्याणकारी प्रकाशन (श्रेणी)
एमआरपी25

पुस्तक के बारे में

कोड268
भाषाहिन्दी
पृष्ठों की संख्या 176
पुस्तकाकार पुस्तकाकार (13.5cm*20.32cm)
ई-बुक MRP:25

विवरण

इस पुस्तक में परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन श्रीजयदयाल गोयन्दका द्वारा शास्त्रीय दृष्टि से धर्म युक्त उन्नति, प्राचीन सिद्धान्तों की उपादेयता, वर्तमान पतन तथा उससे बचने के उपाय, परम पुरुषार्थ इत्यादि विषयों का सुन्दर विवेचन है।

Shri Jayadayal Ji Goyendka

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