
श्रीजयदयालजी गोयन्दकाके शीघ्र कल्याणकारी प्रकाशन
प्रेमयोग का तत्त्व | गीता प्रेस, गोरखपुर | प्रेमयोग का तत्त्व | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 527
उपलब्ध है
₹45
इस पुस्तकमें प्रेमका स्वरूप, श्रद्धा और प्रेम, प्रेम और शरणागति आदि अनेक महत्त्वपूर्ण विषयोंके विशद विश्लेषणके साथ भगवान् श्रीरामके प्रति महाराज दशरथ, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, सीता सुतीक्ष्ण आदिके अलौकिक प्रेम-भावका अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किया गया है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
1
एसकेयू: 527
टैग:Shri Jayadayal Ji Goyendka
शेयर करना:
इस पुस्तकमें प्रेमका स्वरूप, श्रद्धा और प्रेम, प्रेम और शरणागति आदि अनेक महत्त्वपूर्ण विषयोंके विशद विश्लेषणके साथ भगवान् श्रीरामके प्रति महाराज दशरथ, भरत, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, सीता सुतीक्ष्ण आदिके अलौकिक प्रेम-भावका अनुकरणीय आदर्श प्रस्तुत किया गया है।
- 192 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
त्वरित शिपिंग
पूरे भारत में डिलीवरी
सुविधाजनक भुगतान
यूपीआई, कार्ड और कैश ऑन डिलीवरी
24x7 सहायता
हम आपकी सहायता के लिए उपलब्ध हैं