श्री वामन पुराण – गुजराती अनुवाद सहित सचित्र संस्करण | भाषा: गुजराती | कोड: 2339

पुराण, उपनिषद् आदि (श्रेणी)
एमआरपी180

पुस्तक के बारे में

कोड2339
पृष्ठों की संख्या 0
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हार्ड बाउंड MRP 180

विवरण

प्रतिष्ठित गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित श्री वामन पुराण, अठारह महापुराणों में से एक का प्रामाणिक और सुंदर सचित्र गुजराती अनुवाद है। यह पुराण भगवान विष्णु के वामन अवतार पर केंद्रित है, जो एक दिव्य बौने अवतार थे जिन्होंने शक्तिशाली राजा बलि को परास्त करके ब्रह्मांडीय संतुलन बहाल किया था।

पुराण में गहन आध्यात्मिक प्रसंगों का वर्णन है, जिनमें शामिल हैं:

✔ वामन भगवान का जन्म और कार्य

✔ राजा बलि की उदारता और भक्ति

✔ देवताओं, ऋषियों, दिव्य लोकों और ब्रह्मांडीय घटनाओं की कथाएँ

✔ धर्म, भक्ति, कर्म और धार्मिक आचरण पर शिक्षाएँ

इस संस्करण में रंगीन चित्र शामिल हैं जो दिव्य आख्यानों को दृष्टिगत रूप से निखारते हैं और प्राचीन काल के आध्यात्मिक वातावरण को जीवंत करते हैं। स्पष्ट गुजराती अनुवाद इस पाठ को उन परिवारों, छात्रों और आध्यात्मिक साधकों के लिए सुलभ बनाता है जो इस पवित्र ग्रंथ को सरल और भक्तिपूर्ण तरीके से समझना चाहते हैं।

गीता प्रेस की विशिष्ट प्रामाणिकता और गुणवत्ता के साथ, यह पुस्तक घर पर पढ़ने, आध्यात्मिक अध्ययन, त्योहारों और भक्ति प्रेरणाओं का प्रतीक।


वामन अवतार और सनातन धर्म की दिव्य कथाओं का वर्णन करने वाला एक पवित्र पुराण


मुख्य विशेषताएँ :

"प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण — विश्वसनीय और उच्च-गुणवत्ता वाले आध्यात्मिक प्रकाशनों के लिए जाना जाता है।

सचित्र संस्करण — इसमें वामन अवतार और बलि के समर्पण जैसी प्रमुख घटनाओं के सुंदर रंगीन चित्र शामिल हैं।

गुजराती अनुवाद शामिल — आधुनिक पाठकों के लिए प्राचीन संस्कृत पुराण को सरल बनाता है।

महत्वपूर्ण विषयों — धर्म, भक्ति, सृष्टि की कहानियाँ, ऋषि शिक्षाएँ और दैवीय हस्तक्षेप — को शामिल करता है।

सभी पाठकों के लिए आदर्श — छात्रों, परिवारों, भक्तों और आध्यात्मिक शिक्षार्थियों के लिए बिल्कुल उपयुक्त।

उच्च-गुणवत्ता वाला मुद्रण और लेआउट — स्पष्ट टाइपसेटिंग, टिकाऊ बाइंडिंग और आकर्षक प्रस्तुति।

आध्यात्मिक रूप से समृद्ध — नैतिक जीवन, भगवान विष्णु के प्रति समर्पण और ब्रह्मांडीय व्यवस्था की समझ को प्रोत्साहित करता है।

उत्सवों पर पढ़ने के लिए उत्तम — वामन जयंती और विष्णु-संबंधी अनुष्ठानों के दौरान विशेष रूप से सार्थक।"

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