श्री पांडव प्रताप | भाषा: मराठी | साइज़: बड़ा (ग्रंथकार) | कोड: 1817

पुराण, उपनिषद् आदि (श्रेणी)
एमआरपी200

पुस्तक के बारे में

कोड1817
भाषामराठी
पृष्ठों की संख्या 608
पुस्तकाकार ग्रन्थाकार (18.62cm*27.1cm)
हार्ड बाउंड MRP 200

विवरण

श्री पांडव प्रताप एक पूजनीय मराठी आध्यात्मिक कृति है जो भक्ति और धर्म के प्रकाश में पांडवों की दिव्य कृपा, नैतिक शक्ति और अटूट निष्ठा को उजागर करती है। महाभारत परंपरा में निहित यह पुस्तक केवल ऐतिहासिक घटनाओं पर ही नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण के मार्गदर्शन में प्राप्त धर्म की आंतरिक आध्यात्मिक विजय पर केंद्रित है। सरल और भक्तिमय मराठी में प्रस्तुत यह ग्रंथ पाठकों को विश्वास, कर्तव्य, समर्पण और विपरीत परिस्थितियों में दृढ़ता पर चिंतन करने के लिए प्रेरित करता है। कथा इस बात पर बल देती है कि कैसे दिव्य मार्गदर्शन मानवीय संघर्ष को आध्यात्मिक विजय में बदल देता है, जिससे पांडव आदर्श आचरण, भक्ति और नैतिक साहस के उदाहरण बन जाते हैं।


प्रमुख विशेषताऐं

गोरखपुर स्थित गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित यह पुस्तक संस्था की प्रामाणिकता, शास्त्रानुसार निष्ठा और भक्तिमय स्पष्टता की सुस्थापित परंपरा का अनुसरण करती है।

यह मराठी भाषी भक्तों के लिए दैनिक पठन, सत्संग चर्चाओं और आध्यात्मिक अध्ययन के लिए उपयुक्त है।

यह पुस्तक धर्म और दिव्य मार्गदर्शन में आस्था जगाती है।

नैतिक शक्ति, धैर्य और भक्ति को प्रोत्साहित करती है।

युद्धक्षेत्र से परे पांडवों की गहरी समझ प्रदान करती है।

आध्यात्मिक चिंतन और भक्ति साधना में सहायक है।

मराठी में भक्ति साहित्य की तलाश करने वाले पाठकों के लिए आदर्श है।

Gita Press Gorakhpur

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