
परम श्रध्देय श्रीहनुमानप्रसादजी पोद्दार (भाईजी )-के अनमोल प्रकाशन
श्रीभगवन्नाम चिन्तन | गीता प्रेस, गोरखपुर | श्रीभगवन्नाम चिन्तन | हिंदी |आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) |कोड: 338
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हमारे शास्त्रों में श्रीभगवन्नाम की महिमा अतुलनीय है। कलियुगी प्राणियों के लिये भगवन्नाम ही परम साध्य और साधन है। प्रस्तुत पुस्तक श्रद्धेय श्री भाईजी के भगवन्नाम-विषयक लेखों, विचारों और पत्रों का सुन्दर संग्रह है। इसके पठन-पाठन से नाम-जप में सहज ही निष्ठा होती है।
भाषा
हिन्दी
प्रारूप
एसकेयू: 338
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हमारे शास्त्रों में श्रीभगवन्नाम की महिमा अतुलनीय है। कलियुगी प्राणियों के लिये भगवन्नाम ही परम साध्य और साधन है। प्रस्तुत पुस्तक श्रद्धेय श्री भाईजी के भगवन्नाम-विषयक लेखों, विचारों और पत्रों का सुन्दर संग्रह है। इसके पठन-पाठन से नाम-जप में सहज ही निष्ठा होती है।
- 208 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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