
स्वर्ण पथ
स्वर्ण पथ · हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 132 · हिन्दी
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इस विशाल संसार में ईश्वर ही सुख-शान्ति का आगार है। जीवन की सच्ची समृद्धि प्राप्त करने के लिये हमें आस्तिक बन कर अपने जीवन एवं आदर्शों का सही निर्माण करना चाहिये। डॉ. रामचरण महेन्द्र के द्वारा प्रणीत यह पुस्तक तुम महान् हो, निराशाका अन्त, जागते रहो, जीवन-धन, अध्यात्म विद्या, गृहस्थ में संन्यास आदि अनेक शीर्षकों की सुन्दर व्याख्या के रूप में आध्यात्मिक स्वर्णपथ की सच्ची परिचायिका है।
भाषा
प्रारूप
एसकेयू: 132
इस विशाल संसार में ईश्वर ही सुख-शान्ति का आगार है। जीवन की सच्ची समृद्धि प्राप्त करने के लिये हमें आस्तिक बन कर अपने जीवन एवं आदर्शों का सही निर्माण करना चाहिये। डॉ. रामचरण महेन्द्र के द्वारा प्रणीत यह पुस्तक तुम महान् हो, निराशाका अन्त, जागते रहो, जीवन-धन, अध्यात्म विद्या, गृहस्थ में संन्यास आदि अनेक शीर्षकों की सुन्दर व्याख्या के रूप में आध्यात्मिक स्वर्णपथ की सच्ची परिचायिका है।
- 176 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
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