
जित देखूँ तित तू
जित देखूँ तित तू · हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 605 · हिन्दी
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इस पुस्तक में सब कुछ भगवान् ही हैं; गीता के इस महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त का प्रतिपादन करते हुए श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज ने भक्ति की श्रेष्ठता, अनिर्वचनीय प्रेम, संयोग, वियोग और योग आदि अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों पर उपयोगी दृष्टान्तों के माध्यम से सुन्दर विवेचन किया है।
एसकेयू: 605
अन्य भाषाओं में उपलब्ध: गुजराती, मराठी
इस पुस्तक में सब कुछ भगवान् ही हैं; गीता के इस महत्त्वपूर्ण सिद्धान्त का प्रतिपादन करते हुए श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज ने भक्ति की श्रेष्ठता, अनिर्वचनीय प्रेम, संयोग, वियोग और योग आदि अनेक महत्त्वपूर्ण विषयों पर उपयोगी दृष्टान्तों के माध्यम से सुन्दर विवेचन किया है।
- 144 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
3 संस्करण · 3 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| जित देखूँ तित तू | गुजराती | 128 | 1295 | ₹20 |
| जित देखूँ तित तू (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 144 | 605 | ₹25 |
| जित देखूँ तित तू | मराठी | 160 | 1210 | ₹15 |
जित देखूँ तित तू · गुजरातीकोड 1295 · 128 पृष्ठ · ₹20

जित देखूँ तित तू · हिन्दी
कोड 605 · 144 पृष्ठ · ₹25 · यह पृष्ठ
जित देखूँ तित तू · मराठीकोड 1210 · 160 पृष्ठ · ₹15
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