
सत्संग का प्रसाद
सत्संग का प्रसाद · हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 426 · हिन्दी
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परम श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज द्वारा विरचित इस पुस्तक में आत्मोद्धार के मार्ग में आने वाले विघ्नों के निवारण के लिये एक निश्चय, सत्संग की आवश्यकता, विकार आप में नहीं आदि अनेक विषयों पर समुचित प्रकाश डाला गया है।
एसकेयू: 426
अन्य भाषाओं में उपलब्ध: गुजराती
परम श्रद्धेय स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज द्वारा विरचित इस पुस्तक में आत्मोद्धार के मार्ग में आने वाले विघ्नों के निवारण के लिये एक निश्चय, सत्संग की आवश्यकता, विकार आप में नहीं आदि अनेक विषयों पर समुचित प्रकाश डाला गया है।
- 80 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
2 संस्करण · 2 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| सत्संगका प्रसाद | गुजराती | — | 946 | ₹10 |
| सत्संग का प्रसाद (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 80 | 426 | ₹15 |
सत्संगका प्रसाद · गुजरातीकोड 946 · ₹10

सत्संग का प्रसाद · हिन्दी
कोड 426 · 80 पृष्ठ · ₹15 · यह पृष्ठ
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