
श्रध्देय स्वामी श्रीरामसुखदासजीके कल्याणकारी साहित्य
जिन खोजा तिन पाइयां
जिन खोजा तिन पाइयां · हिंदी · आकार: मध्यम (पुस्तकाकार) · कोड: 421 · हिन्दी
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इस पुस्तक में आत्मज्ञान को विश्लेषित करने वाले जिन खोजा तिन पाइयाँ, सत्-असत का विवेक, भोग और योग आदि अनेक विषयों पर स्वामीजी के अनुभवी विचारों का अनुपम संग्रह है।
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एसकेयू: 421
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अन्य भाषाओं में उपलब्ध: बाँग्ला
इस पुस्तक में आत्मज्ञान को विश्लेषित करने वाले जिन खोजा तिन पाइयाँ, सत्-असत का विवेक, भोग और योग आदि अनेक विषयों पर स्वामीजी के अनुभवी विचारों का अनुपम संग्रह है।
- 96 पृष्ठ
- भाषा: हिन्दी
- उत्तम कागज पर टिकाऊ हार्ड बाइंडिंग
- प्रामाणिक गीता प्रेस संस्करण, पीढ़ियों से विश्वसनीय
इस कृति के सभी संस्करण
2 संस्करण · 2 भाषाएँ| संस्करण | भाषा | पृष्ठ | कोड | मूल्य |
|---|---|---|---|---|
| भोग और योग | बाँग्ला | 96 | 1359 | ₹15 |
| जिन खोजा तिन पाइयां (यह पृष्ठ) | हिन्दी | 96 | 421 | ₹15 |
भोग और योग · बाँग्लाकोड 1359 · 96 पृष्ठ · ₹15

जिन खोजा तिन पाइयां · हिन्दी
कोड 421 · 96 पृष्ठ · ₹15 · यह पृष्ठ
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